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बिहार का खास व्यंजन है लिट्टी-चोखा, त्रेता काल से जुड़ा है इतिहास

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बिहार का खास व्यंजन है लिट्टी-चोखा, त्रेता काल से जुड़ा है इतिहास
नयी दिल्ली : बुधवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर लगे हुनर हाट मेले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तसवीर सामने आयी, जिसमें वे लिट्टी चोखा खाते नजर आ रहे हैं. देखते ही देखते यह तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी. कुछ लोगों ने इस तस्वीर को आगामी बिहार चुनाव से जोड़ा, तो वहीं कुछ ने लिट्टी चोखा की शान से.आइये जानते हैं लिट्टी चोखा के बारे में…

लिट्टी चोखा मूलत: बिहार का व्यंजन है. हालांकि इसे झारखंड और पूर्वी उत्तर में भी खाया जाता है. लिट्टी बनाने में सत्तू और आटे का प्रयोग किया जाता है. इसके साथ टमाटर की चटनी और आलू और बैंगन का चोखा भी खाया जाता. ठंड के दौरान इसका उपयोग और भी बढ़ जाता है..

विश्वामित्र ने भगवान राम के साथखाया थालिट्टी-चोखा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लिट्टी चोखा त्रेतायुग के समय से ही बिहार में खाया जाता था. महर्षि विश्वामित्र ने पंचकोसी यात्रा के दौरान राम-लक्ष्णम के साथ चरित्रवन( अभी बक्सर) में लिट्टी-चोखा खाया था. यह परंपरा आज भी बक्सर में पंचकोसी मेले के दौरान निभाई जाती है.
मगध काल में प्रसार बढ़ा
लिट्टी चोखा का प्रचार प्रसार मगध काल में तेजी से बढ़ा.हालांकि इतिहास में यह लिखित रूप से कहीं दर्ज नहीं मिलता है कि लिट्टी-चोखा का विस्तार कैसे हुआ. जानकारों का कहना है कि जब बिहार के लोगों ने अपने प्रदेश से पलायन किया, तो वे यहां से लिट्टी-चोखा को भी लेकर गये और इस तरह से इसका विस्तार होता गया.
अंग्रेज काल में चोखा का स्थान मटन ने ले लिया
1757 के बाद भारत में अंग्रेजों का वर्चस्व बढ़ने लगा, इसी के साथ ही लिट्टी चोखा में नये प्रयोग भी होने लगे. अंग्रेजों ने लिट्टी-चोखा साथ मटन का प्रयोग शुरू किया. आज भी बड़े-बड़े कार्यक्रमों में लिट्टी-मटन बड़े चाव से खाया जाता है.
कैसे बनता है लिट्टी-चोखा
लिट्टी-चोखा बनाने के लिए गोयठा(उपले) वाली आग सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसमें लिट्टी यानी आटे की लोई में मसालेदार सत्तू को भरा जाता है, फिर उसे इस आग में सेंका जाता है. साथ ही बैंगन और टमाटर को भी आग में सेंका जाता है. फिर चोखा के लिए बैगन, टमाटर और हरी मिर्च का प्रयोग किया जाता है. समय के साथ लिट्टी बनाने के तरीके में काफी परिवर्तन आ जा चुका है, लेकिन नहीं बदला तो इसका स्वाद और इसके प्रति लोगों की दीवानगी.

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