नयी दिल्ली: देश में महिलाओं के खिलाफ जहां लगातार अपराध बढ़ रहे हैं तो दूसरी ओर महिलाओं के मामले पर नेताओं के विवादास्पद बयान लगातार आ रहे है. गुरूवार को टीडीपी के सांसद एम. मुरली मोहन ने महिलाओं के पहनावे को लेकर टिप्पणी की थी जिसमें उन्होंने महिलाओं को पारंपरिक परिधान पहनने की सलाह दी थी.
टीडीपी सांसद के बयान पर संसद में आज भी हंगामा हुआ. हालांकि बाद में उन्होंने इस मुद्दे पर माफी मांग ली थी.टीडीपी सांसद ने कल लोकसभा में महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले उत्पीड़न पर चर्चा के दौरान ये टिप्पणी की थी.
इस टिप्पणी को लेकर संसद में हंगामा हो गया था. कुछ महिला सांसदों ने टीडीपी नेता के बयान का विरोध किया. इस पर सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी.
एनसीपी की सुप्रिया सुले और कांग्रेस की कुमारी सुष्मिता देव ने इस पर कड़ी आपत्ति जतायी. वहीं कांग्रेस की अंबिका सोनी ने कहा कि देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले बढ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक दलों के नेता और सांसद भी महिलाओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां करेंगे तो दूसरों पर क्या असर पडेगा. इस दौरान महिलाओं के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस सदस्यों का हंगामा
*महिलाओं के कपड़ों पर पहले भी दे चुके हैं नेता विवादास्पद बयान
कैबिनेट मंत्री रहे मध्यप्रदेश के कैलाश विजयवर्गीय ने गुवाहाटी में हुई छेड़छाड़ की घटना के बाद उन्होंने कहा था कि महिलाओं को इस तरह के कपड़े पहनने चाहिए कि दूसरों के मन में उनके प्रति सम्मान की भावना जागे.
वहीं सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले नरेश अग्रवाल ने भी एक शर्मनाक बयान देते हुये कहा था कि ऐसी घटनाओं को यदि रोकना है तो लड़कियों को कपड़े पहनने के तौर तरीकों पर ध्यान देना होगा.
*कब होगी सरकार गंभीर
एक ओर महिलाओं के साथ होने वाले यौन एवं अन्य अपराध बढ़ते जा रहे हैं जो दूसरी ओर नेता इस मामले पर असंवेदनशील बयान देते रहते है. इन मामलों को देखते हुए लगता है कि सरकार और नेता महिलाओं के मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है.
और बयान के बाद नेता बयान को लेकर माफी मांग कर पल्ला झाड़ लेते है. लेकिन इस स्तर पर कहीं कोई ठोस पहल नहीं की जाती है. इस तरह के बयानों को लेकर सांसदों और नेताओं के खिलाफ मानहानि का दावा किया जाना चाहिये
