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Home National महाराष्‍ट्र गतिरोध पर पहली बार बोले शाह, शिवसेना की शर्तें मंजूर नहीं, राज्‍यपाल ने दिया पर्याप्‍त समय

महाराष्‍ट्र गतिरोध पर पहली बार बोले शाह, शिवसेना की शर्तें मंजूर नहीं, राज्‍यपाल ने दिया पर्याप्‍त समय

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महाराष्‍ट्र गतिरोध पर पहली बार बोले शाह, शिवसेना की शर्तें मंजूर नहीं, राज्‍यपाल ने दिया पर्याप्‍त समय

मुंबई : महाराष्‍ट्र में किसी भी दल की ओर से सरकार न बना पाने के बाद राष्‍ट्रपति शासन लगा दिया गया है. अब इसको लेकर शिवसेना सहित कांग्रेस और एनसीपी राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यार पर हमलावार हो गयी हैं.

इधर महाराष्‍ट्र गतिरोध पर गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार बयान दिया है. उन्‍होंने राज्‍यपाल के फैसला का बचाव किया और शिवसेना को जमकर लताड़ा. उन्‍होंने कहा, शिवसेना की शर्तें हम नहीं मान सकते. चुनाव के पहले पीएम और मैंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि अगर हमारा गठबंधन जीता तो देवेंद्र फडणवीस सीएम होंगे. तब किसी को आपत्ति नहीं हुई. अब वह एक नई मांग को लेकर आ गए हैं, जो हमें स्वीकार नहीं है.

राज्‍यपाल के फैसले पर शाह ने कहा, राष्‍ट्रपति शासन पर इतनी जो हायतौबा मची हुई है, यह केवल कोरी राजनीति है. इस मुद्दे पर विपक्ष राजनीति कर रही है. एक संवैधानिक पद को इस तरह से राजनीति में घसीटना, मैं नहीं मानता लोकतंत्र के लिए सही परंपरा है.शाह ने कहा, इससे पहले किसी भी राज्य को इतना वक्त नहीं दिया गया था. राज्यपाल ने विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ही सभी पार्टियों को सरकार बनाने को आमंत्रित किया था. ना शिवसेना, ना ही कांग्रेस-एनसीपी ने दावा पेश किया. अब भी कोई पार्टी जिसके पास आंकड़े हैं, राज्यपाल से संपर्क कर सकती है.

शाह ने एनसीपी को दिये गये समय 8:30 के पहले ही राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश करने का भी बचाव किया और कहा – राज्‍यपाल ने समय से पहले इसलिए राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी क्‍योंकि एनसीपी ने पत्र लिखकर खुद अपनी समर्थता जाहिर कर दी थी, वैसे में इंतजार करने की कोई गुंजाइश ही नहीं रह जाती है.

भाजपा अध्यक्ष शाह ने कहा, आज भी अगर किसी के पास बहुमत है तो वो राज्यपाल से मिल कर दावा कर सकता है. उन्होंने कहा, महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन पर विपक्ष की प्रतिक्रिया सिर्फ कोरी राजनीति है. माननीय राज्यपाल जी द्वारा कहीं भी संविधान को तोड़ा-मरोड़ा नहीं गया.

शाह ने कहा, राष्ट्रपति शासन लगाने की आवश्यकता इसलिए भी पड़ी ताकि विपक्ष ये आरोप ना लगाए कि राज्यपाल भाजपा की अस्थायी सरकार को चला रहे हैं. अब सबके पास छह महीने का समय है अगर किसी के पास बहुमत है तो राज्यपाल से मिल ले. केंद्र ने मंगलवार को राज्यपाल की सिफारिश के बाद महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया.

शिवसेना और कांग्रेस ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने के लिए राज्यपाल पर निशाना साधा था और उन पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया.

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