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न्यायपालिका सामान्य आपराधिक मामलों की तरह ही आतंकी मामलों को देखती है : डोभाल

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न्यायपालिका सामान्य आपराधिक मामलों की तरह ही आतंकी मामलों को देखती है : डोभाल

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने सोमवार को कहा कि न्यायपालिका सामान्य आपराधिक मामलों की तरह ही आतंकवादी मामलों को भी देखती है और संकेत दिया कि यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चुनौती है.

आतंकवाद विरोधी दस्तों (एटीएस) के प्रमुखों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमलों को अंजाम देने के लिए बेहद कुशल तकनीक तक आतंकवादियों की पहुंच ने उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाने को बेहद मुश्किल और जटिल बना दिया है. भारत में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का जिक्र करते हुए डोभाल ने कहा कि पड़ोसी देश ने आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति का एक हिस्सा बना लिया है, जो बहुत बड़ी चुनौती है. दूसरा, उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक तक पहुंच ने साक्ष्यों के संग्रहण को बेहद मुश्किल और जटिल बना दिया है, तीसरा न्यायपालिका का रुख जो आतंकवाद को सामान्य मामलों की तरह ही देखती है.

एनएसए ने कहा, वे (न्यायालय) वही मानदंड और मानक अपनाते हैं. किसी मामले को बनाने के लिए आपको प्रत्यक्षदर्शी चाहिए. आतंकवाद के मामलों में आप कहां से प्रत्यक्षदर्शी लायेंगे? पहला, ऐसे मामलों में बेहद कम प्रत्यक्षदर्शी होते हैं. किसी आम नागरिक के लिए कुख्यात जैश-ए-मोहम्मद या लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी के खिलाफ गवाही देना बहुत-बहुत मुश्किल है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को आतंकवादियों से लड़कर, उनका वित्तपोषण बंद करके, हथियार छीनकर और उनकी लड़ने की क्षमता को घटाकर खत्म किया जा सकता है. डोभाल ने कहा, आतंकवादियों की मूल मंशा नागरिक समाज को आतंकित करने की होती है.

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