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Home National लोकसभा चुनाव : बादल परिवार के सामने प्रतिष्ठा का सवाल, अपने ही गढ़ में है भाजपा के सहारे

लोकसभा चुनाव : बादल परिवार के सामने प्रतिष्ठा का सवाल, अपने ही गढ़ में है भाजपा के सहारे

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लोकसभा चुनाव : बादल परिवार के सामने प्रतिष्ठा का सवाल, अपने ही गढ़ में है भाजपा के सहारे

बठिंडा से अखिल तलवार

-हरसिमरत की हैट्रिक आसान नहीं
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के लिए हैट्रिक बनाना आसान नहीं दिख रहा है. इस सीट पर बादल परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. शिरोमणि अकाली दल अपना मजबूत किला बचाने के लिए पूरी तरह भाजपा के सहारे नजर आ रहा है. पंजाब के पुराने शहरों में शुमार बठिंडा में शानदार सड़कें, सफाई, स्ट्रीट लाइटें, मॉल्स, फ्लाइ ओवर देख कर उन लोगों की बातों पर भरोसा होने लगता है, जो कहते हैं कि हरसिमरत और अकाली-भाजपा सरकार ने दस सालों में शहर को काफी कुछ दिया है.
इसके बाद भी हरसिमरत अपनी चुनावी सभा में पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रही हैं. कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को शुरुआत में कमजोर कैंडिडेट माना जा रहा था. लेकिन, कैंपेन जैसे-जैसे आगे बढ़ा, मुकाबला कांटे का होता गया. वड़िंग के चुनाव की कमान उनकी पत्नी अमृता वड़िंग ने संभाल रखी है, तो हरसिमरत के लिए 92 की उम्र में ससुर प्रकाश सिंह बादल गांवों की खाक छान रहे हैं. रोज बदलते समीकरण के बीच यह पंजाब की सबसे चर्चित सीट बन चुकी है. बठिंडा की चुनावी बिसात पर दो और अहम मोहरे हैं.
आम आदमी पार्टी से बलजिंदर कौर खड़ी हैं. कांग्रेस को लगता है कि ग्रामीण इलाकों में आप को जो भी वोट मिलेंगे. उससे शिअद का नुकसान होगा. लेकिन अकाली-भाजपा को लगता है कि आप और खैरा कांग्रेस का नुकसान कर रहे हैं.

किसान आत्महत्याएं मुद्दा नहीं
बठिंडा-मानसा की कॉटन बेल्ट में सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या कीं. जहरीले पानी से कैंसर व कई अन्य बीमारियां फैल रही हैं, पर ये अहम मुद्दे चुनावी चर्चा से बाहर हैं. कांग्रेस कर्ज माफी का वादा कर सत्ता में आयी. माफी शुरू भी की, पर जनता इसे काफी नहीं मानती है.
यहां कैद रही थीं हिंदुस्तान की पहली मल्लिका
बठिंडा ऐतिहासिक शहर है, यहां के किला मुबारक में हिंदुस्तान की पहली मल्लिका रजिया सुल्तान को कैद रखा गया था. इस किले पर मोहम्मद गोरी ने कब्जा कर लिया था, 13 माह बाद पृथ्वीराज चौहान ने दोबारा इसे हासिल किया. श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां रहे थे. किला मुबारक और गुरद्वारा साहिब आस्था के केंद्र हैं. पुरातत्व विभाग ने इसे हैरिटेज साइट घोषित किया है.
बादल पिंड में सिर्फ बादल
मुक्तसर जिले में दाखिल होने पर गांव बादल पड़ता है. ये कहीं से गांव नहीं है. यहां अस्पताल, स्टेडियम से लेकर ओल्ड एज होम तक हैं. पास ही गांव माना को हरसिमरत ने गोद लिया था. लोग कहते हैं, जब भी बादल साब जेल गये, माना के लोग उनके साथ गये.
बदली है तलवंडी साबो की हवा
बठिंडा के तलवंडी साबो में सिखों के पांच तख्तों में से एक श्री दमदमा साहिब है. 2017 में विस में यहां से आप की बलजिंदर कौर जीती थीं, इस बार हवा बदली नजर आती है. ज्वेलर सुखविंदर सिंह कहते हैं, शिअद से नाराज लोगों ने आप को वोट दिये थे. बेअदबी से अब भी नाराज हैं, आप वाली ने कोई वादा पूरा नहीं किया.
चुनाव से पहले शिअद का सेल्फ गोल
कुछ दिन पहले शिअद की शिकायत पर बेअदबी, फायरिंग की जांच कर रही एसआइटी के आइजी का तबादला कर दिया गया. इसे शिअद का सेल्फ गोल माना जा रहा है, इससे बेअदबी का मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है. 2015 में श्रीगुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की कई घटनाएं हुई थीं. इनके विरोध में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में दो की मौत हो गयी थी. इससे अकालियों से नाराज जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया था.
डेरा फैक्टर पर सबकी नजरें
इस सीट पर डेरा सच्चा सौदा के समर्थन महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं. 2017 में डेरे ने शिअद को समर्थन दिया था. गुरमीत राम रहीम को सजा और डेरे पर पुलिस कार्रवाई के बाद भी यह निर्णायक स्थिति में है. डेरा प्रमुख को सजा के बाद उनके पास ताकत दिखाने का यह पहला मौका है.
बठींडा का पिछला चुनाव परिमाण
514727 -हरसिमरत कौर बादल, शिअद
495332- मनप्रीत बादल, कांग्रेस
87901- जस्सी जसराज,आप
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