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Home National 34 साल पुराने इतिहास को दोहराने की कोशिश में कांग्रेस: भोपाल में दिग्विजय और साध्वी प्रज्ञा की लड़ाई दिलचस्प मोड़ पर

34 साल पुराने इतिहास को दोहराने की कोशिश में कांग्रेस: भोपाल में दिग्विजय और साध्वी प्रज्ञा की लड़ाई दिलचस्प मोड़ पर

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34 साल पुराने इतिहास को दोहराने की कोशिश में कांग्रेस: भोपाल में दिग्विजय और साध्वी प्रज्ञा की लड़ाई दिलचस्प मोड़ पर

मिथिलेश
भोपाल : शाम के सात बजे भोपाल शहर के एक पॉश इलाके रिवेरा क्लब कॉलोनी में मप्र के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह लोगों से पूछ रहे हैं- कितने लोगों के पास उज्ज्वला गैस कनेक्शन है? सब चुप. एक व्यक्ति ने खड़े होकर कहा- इसमें लाभ ही नहीं है, तो क्यूं लें? दिग्विजय सिंह हाथ में माइक लेकर कहते हैं- कांग्रेस की सरकार बनी, तो उज्ज्वला योजना बंद. डीलरों पर चल रहे केस भी वापस.

राजा साहब कहते हैं- आप लोग मुझे वोट देगे? भीड़ से आवाज आती है- हां. अपनी जेब में रखे मोबाइल की ओर इशारा करते हुए राजा साहब कहते हैं- मेरा नंबर भी सब लोग लिख लो. फोन मत करना. मैसेज भेजना. 24 से 48 घंटे के अंदर मैं जवाब दूंगा.विधानसभा चुनाव में मिली जीत से कांग्रेस उत्साहित है. शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि दिग्विजय सिंह की लड़ाई मुश्किल नहीं होगी, पर भाजपा ने उनके मुकाबले साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उतार कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.

साध्वी मंच पर रोती हैं. अपने ऊपर हुए जेल में अत्याचार की कहानी कहती हैं. साथ में दिग्विजय सिंह पर व्यक्तिगत हमले भी करती हैं. उनकी दूसरी शादी पर भी आक्षेप करती हैं. दिग्विजय सिंह कहते हैं- मुझे कुछ नहीं कहना. साध्वी की उम्मीदवारी से कोई फर्क नहीं पड़ता. उम्मीदवार कोई भी हो. चुनौती तब थी, आज भी है.

मप्र में लोस की 29 सीटें हैं. 2014 में कांग्रेस को तीन सीटें मिली थीं. इस बार पार्टी कितनी सीटों पर जीत रही? दिग्विजय सिंह कहते हैं- पिछली बार से तीन गुना अधिक. भोपाल शहर में 12 मई को चुनाव होना है, पर यहां अभी चुनाव का माहौल नहीं बन पाया है. शहर के चौक-चौराहों पर कोई पोस्टर नहीं, नारेबाजी नहीं दिखती.

शहंशाह पार्क के सामने की सरकारी भवन की दीवार पर हाल ही में रामायण की पंक्तियां उकेरी गयी हैं. कुछ कलाकार अब भी चित्रकारी कर रहे हैं, पर राजनीतिक नारा कहीं नहीं दिख रहा. दिग्विजय सभाओं में शिवराज सिंह पर निशाना साधते हैं. इंदिरा गांधी की बात याद दिलाते हैं कि भोपाल बहुत सुंदर शहर है. इसे और भी सुंदर बनाओ.

भोपाल में रह रहे बिहारियों का यह है मूड
ज्यों-ज्यों चुनाव के दिन करीब आते जायेंगे, मतदाता मुखर होने लगेंगे. रेलवे अधिकारी और बिहार के मधुबनी जिले के नवहथ गांव के रहने वाले सुमन कुमार कहते हैं- मुकाबला एकतरफा नहीं है.वहीं मुजफ्फरपुर निवासी साफ्टवेयर इंजीनियर कुमुद कहते हैं- भ्रष्टाचार की खिलाफत करने वाली पार्टी को ही वोट देंगे. कस्टम अधिकारी ओम प्रकाश सिंह कहते हैं- कांग्रेस की किसानों की कर्जा माफी का असर ग्रामीण इलाकों में है. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अधिकारी श्यामानंद दास शिवराज सिंह चौहान के मुरीद हैं.कहते हैं, बिड़ला मंदिर की सीढियां उतरते पत्नी गिर पड़ी थीं. सामने से शिवराज आ रहे थे. वह खुद दौड पड़े और पत्नी को सहारा दिया. दास की नजर में दिग्विजय सिंह बड़े नेता हैं, लेकिन पब्लिक जुड़ाव शिवराज का है. सीवान जिले के रहने वाले गांधी शर्मा मेन बाजार में फर्नीचर का कारोबार करते हैं.
दिग्गी डाउन टू अर्थ हुए
इधर, मुकाबले को आसान नहीं मान, दिग्विजय सिंह डाउन टू अर्थ हो चुनाव प्रचार कर रहे. अभी तक उन्होंने पूरे क्षेत्र को चार बार छान मारा है. भाजपा के नेता कहते हैं- यहां तो पूरी सरकार लड़ रही है. कमलनाथ सरकार के छह मंत्री दिग्विजय की चुनावी कमान संभाले हुए हैं. सीतामढी के मूल निवासी देवेंद्र चंद्र लाल मध्य प्रदेश की सरकार में कार्यरत हैं. वे कहते हैं- यहां काटे की टक्कर है. दिग्विजय सिंह के मुकाबले भाजपा किसी और को उम्मीदवार बनाती तो निर्णय कुछ और होता. मगर अब तो दिग्गी राजा का जोर है.
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