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Home National इतिहास में पहली बार प्राइवेट सेक्टर के विशेषज्ञ सरकार में हुए शामिल, निजी क्षेत्र के नौ विशेषज्ञ बने ज्वाइंट सेक्रेटरी

इतिहास में पहली बार प्राइवेट सेक्टर के विशेषज्ञ सरकार में हुए शामिल, निजी क्षेत्र के नौ विशेषज्ञ बने ज्वाइंट सेक्रेटरी

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इतिहास में पहली बार प्राइवेट सेक्टर के विशेषज्ञ सरकार में हुए शामिल, निजी क्षेत्र के नौ विशेषज्ञ बने ज्वाइंट सेक्रेटरी

नेशनल कंटेंट सेल
केंद्र सरकार ने संयुक्त सचिव के पदों के लिए सीधी भर्ती के तहत निजी क्षेत्र के नौ पेशेवरों का चयन किया है. सरकार का यह कदम नीति निर्धारण के मामले में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है. संभवतः देश के इतिहास में यह पहली बार है जब अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों का इतना बड़ा समूह सरकार में शामिल होगा. अब तक इन पदों पर अधिकतर उन्हीं लोगों को नियुक्त किया जाता था जो यूपीएससी की परीक्षाओं में पास होकर अधिकारी बनते थे और करियर में लंबा अनुभव हासिल करने के बाद इन अधिकारियों को संयुक्त सचिवों के पद पर तैनात किया जाता था. खबर के मुताबिक निजी क्षेत्र से आये पेशेवरों का स्तर भी संयुक्त सचिव जैसा ही हो, इसलिए इनके चयन की प्रक्रिया यूपीएससी द्वारा संचालित की गयी थी.

कार्मिक मंत्रालय ने पिछले साल जून में सीधी भर्ती व्यवस्था के जरिये संयुक्त सचिव रैंक के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किये थे. इससे संबंधित सरकारी विज्ञापन सामने आने के बाद कुल 6,077 लोगों ने आवेदन किये थे. यूपीएससी ने शुक्रवार को उन विशेषज्ञों की लिस्ट जारी की जो कृषि, नागरिक उड्डयन, वित्त, ट्रांसपोर्ट और शिपिंग जैसे विभागों में शामिल होंगे. इन संयुक्त सचिवों को कॉन्ट्रेक्ट आधार पर अपने संबंधित विभागों में शामिल किया गया है. लैटेरल एंट्री पर कांग्रेस ने भाजपा की खिंचाई की है.

ये बने केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव
अंबर दुबे (सिविल एविएशन), अरुण गोयल (कॉमर्स), राजीव सक्सेना (आर्थिक मामले), सुजीत कुमार बाजपेयी (पर्यावरण, जंगल और जलवायु परिवर्तन), सौरभ मिश्रा (वित्तीय सेवाएं), दिनेश जगदाले (नयी और नवकरणीय ऊर्जा), सुमन प्रसाद सिंह (सड़क परिवहन और हाइवे मिनिस्ट्री), भूषण कुमार ( शिपिंग) और कोकली घोष (कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण).

2005 में लैटेरल एंट्री का आया था प्रस्ताव

वर्ष 2005 में जब प्रशासनिक सुधारों के लिए पहली रिपोर्ट पेश की गयी उस समय ब्यूरोक्रेसी में लैटेरल एंट्री का पहला प्रस्ताव रखा गया था. इसके बाद वर्ष 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गयी. हालांकि, पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक समिति बनायी थी.

यह थी योग्यता

न्यूनतम उम्र सीमा : 40 साल

अधिकतम उम्र सीमा : तय नहीं

पे स्केल : 144,200-218,200 रुपये प्रति महीना

योग्यता : मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन

कार्यकाल : तीन साल/प्रदर्शन के आधार पर पांच साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है

अनुभव : किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर, यूनिवर्सिटी या प्राइवेट कंपनी में 15 साल का अनुभव

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