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राष्ट्रवाद की बयार पहले तीन बार करवा चुकी है बेड़ा पार

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राष्ट्रवाद की बयार पहले तीन बार करवा चुकी है बेड़ा पार
1967 चुनाव में 65 के भारत-पाक युद्ध और 1999 में कारगिल जंग ने इंदिरा और अटल को पहुंचाया फायदा
नयी दिल्ली : सत्ताधारी दल के लिए राष्ट्रवाद की बयार अच्छी चुनावी फसल देती रही है. देश के चुनावी इतिहास में 1967 में इंदिरा गांधी और 1999 चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रवाद के बने माहौल का राजनीतिक लाभ उठा चुके हैं.
इतना ही नहीं 1971 में कांग्रेस में मची अंदरूनी कलह के बावजूद मार्च में हुए चुनाव में इंदिरा ने किसी तरह अपनी सरकार बचा ली थी, लेकिन करीब आठ महीने बाद हुए युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर इंदिरा ने अपने पक्ष में जबरदस्त राजनीतिक माहौल बना लिया था.
71 के चुनाव में जीत के बाद सरकार बनते ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल सैम मानेकशॉ को बांग्लादेश के गठन के ब्लू प्रिंट पर काम करने का आदेश दे दिया था. अब 2019 के चुनाव में मोदी सरकार बेरोजगारी, आर्थिक और विकास जैसे मुद्दे को पीछे रख राष्ट्रवाद का माहौल बनाने में जुटी है.
1967 के चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत
भारत के राजनीतिक रिकाॅर्ड में दर्ज है कि 1962 के भारत चीन युद्ध की वजह से देश पर जबरदस्त आर्थिक बोझ था. तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री इससे उबर भी नहीं पाये थे कि 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया.
‘जय जवान-जय किसान’ के नारे के साथ शास्त्री ने पाकिस्तान के दांत तो खट्टे कर दिये थे, लेकिन अर्थव्यवस्था चरमरा गयी थी. इसके बाद ताशकंद समझौते के दौरान उनकी अकस्मात मौत हो गयी और कांग्रेस की कमान इंदिरा गांधी के हाथ में आ गयी.
उधर, कांग्रेस अंदरूनी कलह के चलते टूट की कगार पर पहुंच गयी थी. तब इंदिरा ने 1967 के चुनाव में कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में 65 युद्ध में शानदार जीत का कार्ड खेला. इसका सीधा फायदा उन्हें मिला.
कारगिल युद्ध: अटल बिहारी वाजपेयी को मिला फायदा
इसी तरह 1999 में सितंबर-अक्तूबर में हुए चुनाव के कुछ महीने पहले ही कारगिल युद्ध समाप्त हुआ था. उस साल अप्रैल में विश्वास प्रस्ताव में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली 13 महीने की मिली-जुली सरकार एक वोट से गिर गयी थी.
उस राजनीतिक अस्थिरता के बीच अटल बिहारी को चुनाव में कारगिल युद्ध की जीत से बने राष्ट्रवाद के माहौल का खासा फायदा हुआ था. 1999 चुनाव की जीत के बाद अटल सहयोगियों की मदद से पांच साल सरकार चलाने में कामयाब रहे थे.
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