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तीन दशकों से अजेय सुमित्रा ताई की राह नहीं है आसान

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तीन दशकों से अजेय सुमित्रा ताई की राह नहीं है आसान
इंदौर : लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन गुजरे 30 सालों के दौरान हुए आठ संसदीय चुनावों में मध्य प्रदेश के इंदौर क्षेत्र में निरंतर अजेय रही हैं, लेकिन ताई के नाम से मशहूर इस 75 वर्षीय भाजपा नेता की चुनावी दावेदारी को इस बार विपक्षी कांग्रेस के साथ अपनी ही पार्टी के एक स्थानीय धड़े से भी खुली चुनौती मिल रही है.
भाजपा और कांग्रेस ने फिलहाल इंदौर सीट पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. इस क्षेत्र में 19 मई को लोकसभा चुनावों का मतदान होना है. बहरहाल, वरिष्ठतम भाजपा नेताओं में शुमार होने वाले सत्यनारायण सत्तन (79) घोषणा कर चुके हैं कि अगर पार्टी ने महाजन को लगातार नौवीं बार इंदौर से चुनावी टिकट दिया, तो खुद उन्हें उनके खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मजबूरन मोर्चा संभालना पड़ेगा.
हिंदी के मंचीय कवि के रूप में भी ख्याति रखने वाले भाजपा नेता ने कहा कि बतौर क्षेत्रीय सांसद महाजन की भूमिका को लेकर अधिकतर भाजपा कार्यकर्ता भी प्रसन्न नहीं हैं, क्योंकि गुजरे पांच सालों में उनसे उनका संपर्क लगभग शून्य रहा है. इंदौर से लगातार आठ बार सांसद चुनी जाने के बावजूद महाजन ने आखिर ऐसा कौन-सा काम किया है, जो उन्हें याद रखा जाये? सत्तन का सुझाव है कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा के स्थानीय विधायक रमेश मैंदोला, क्षेत्रीय विधायक उषा ठाकुर या शहर की महापौर मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ में से किसी को इस बार टिकट दिया जाये.
‘संन्यास लें महाजन’
कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने कहा कि इंदौर के प्रगतिशील मतदाताओं को लोकसभा में नये नुमाइंदे की दरकार है, क्योंकि बतौर क्षेत्रीय सांसद महाजन अपनी भूमिका निभाने में घोर असफल रही हैं. उन्हें वक्त की नजाकत समझते हुए चुनावी सियासत से जल्द-से-जल्द संन्यास ले लेना चाहिए.
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