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Home National भ्रष्टाचार पर लिखी पुस्तक ”ए क्रूसेड अगेंस्ट करप्शन ऑन दी न्यूट्रल पाथ” हुई लांच

भ्रष्टाचार पर लिखी पुस्तक ”ए क्रूसेड अगेंस्ट करप्शन ऑन दी न्यूट्रल पाथ” हुई लांच

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भ्रष्टाचार पर लिखी पुस्तक ”ए क्रूसेड अगेंस्ट करप्शन ऑन दी न्यूट्रल पाथ” हुई लांच

गांधी के रास्ते ही देश से दूर किया जा सकता है भ्रष्टाचार : हरिवंश

ब्यूरो, नयी दिल्ली

भ्रष्टाचार को लेकर बाजार में कई किताबें उपलब्ध है, लेकिन 15 सालों की मेहनत के बाद ‘ए क्रूसेड अगेंस्ट करप्शन ऑन दी न्यूट्रल पाथ’ किताब में भ्रष्टाचार से जुड़े हर पहलू की व्यापक पड़ताल की गयी है. इसमें राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक, संस्थागत और भारत ही नहीं पूरी दुनिया के भ्रष्टाचार का सटीक विश्लेषण किया गया है.

आजादी के बाद भारत में भ्रष्टाचार की व्यवस्था और अव्यवस्था का विश्लेषण है. साथ ही लोकतंत्र के चारों अंगों विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया के अलावा केंद्र, राज्य और पंचायत भ्रष्टाचार के संस्थागत होने का विवरण है. इसके अलावा इसके रोकथाम के उपाय भी सुझाये गये है.

शनिवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री और वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय की मौजूदगी में किताब का विमोचन किया गया. इस मौके पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि भ्रष्टाचार एक व्यापक विषय है और इसके खिलाफ पहली बार 1974 में जयप्रकाश नारायण ने लोगों को सपना दिखाया था.

इसके खिलाफ देश में व्यापक आंदोलन हुए. लेकिन बड़ा सवाल है कि इस आंदोलन के बाद बेहद इमानदार मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर को इस्तीफा देना पड़ा, पर बाद में जो लोग आये उनका आचरण सही नहीं रहा और भ्रष्टाचार पहले के मुकाबले बढ़ गया.

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार कम करने के लिए चुनावी खर्च कम किया जाना चाहिए. हालांकि तकनीक ने इसे कुछ हद तक कम किया है. इसे रोकने के दो रास्ते हैं. एक रास्ता कानूनी है और दूसरा गांधी का मार्ग है. गांधी समाज को चरित्रवान बनाने पर जोर देते थे, लेकिन आज समाज मूल्यविहीन हो गया है. बिना मूल्यों के समाज और देश का निर्माण नहीं हो सकता है.

इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री ने कहा कि भ्रष्टाचार सर्वव्यापक है. इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे कम जरूर किया जा सकता है. आर्थिक उदारीकरण के बाद भ्रष्टाचार में कमी आयी है. क्योंकि अगर पारदर्शिता नहीं होगी तो भ्रष्टाचार होगा. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार सही मायने में पंथनिरपेक्ष, जाति निरपेक्ष है.

इसे खत्म करने के लिए सबसे पहले हमें सोचना होगा कि हमें गलत काम नहीं करना है. कर ढांचे को सरल बनाया जाना चाहिए और नीतियों के निस्तारण की समय सीमा तय होनी चाहिए. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के निदेशक रामबहादुर राय ने कहा कि इस किताब में भ्रष्टाचार को सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रखा गया है. हर पेशे में भ्रष्टाचार का जिक्र किया गया है.

उन्होंने कहा कि बढ़ता चुनाव खर्च भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण है. इस देश में चुनाव सुधार करने की जरूरत है. इस किताब का इस्तेमाल लोग संदर्भ देने के लिए कर सकते हैं. यह किताब इकोनॉमी इंडिया ने प्रकाशित की है. 850 पन्ने की किताब के लेखक वरिष्ठ पत्रकार मनोज मनोहर हैं.

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