[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home National सुप्रीम कोर्ट ने हिजबुल प्रमुख सलाहुद्दीन के बेटे की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने हिजबुल प्रमुख सलाहुद्दीन के बेटे की याचिका खारिज की

0
सुप्रीम कोर्ट ने हिजबुल प्रमुख सलाहुद्दीन के बेटे की याचिका खारिज की

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को हिजबुल मुजाहिदीन के संस्थापक सैयद सलाहुद्दीन के पुत्र सैयद शाहिद यूसुफ की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले में उसकी जमानत याचिका ठुकराने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गयी थी.

शीर्ष अदालत ने कहा कि एक बार जब निचली अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी को मामले में जांच पूरी करने के लिए और समय दे दिया तो आरोपी वैधानिक जमानत का हकदार नहीं है. न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि निचली अदालत और दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने विवेक का इस्तेमाल किया है और फैसले में कुछ भी अवैधता नहीं है. यूसुफ के वकील ने दलील दी कि निचली अदालत ने जांच पूरी करने के लिए समय 180 दिन बढ़ाने के लिए एनआईए के आवेदन को मंजूर करके और आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजकर गलती की.

यूसुफ के वकील ने कहा, कानून के प्रावधानों के तहत, इसे नहीं किया जा सकता. समय को 180 दिन तक टुकड़ों-टुकड़ों में बढ़ाया जा सकता है और एक बार में नहीं बढ़ाया जा सकता. पीठ ने कहा कि हालांकि यह मामले की प्रकृति और इसके प्रभाव पर निर्भर करता है. यूसुफ के वकील पीठ को प्रभावित करने में विफल रहे. पीठ ने कहा कि इस संबंध में कई फैसले हैं और निचली अदालत के फैसले से ऐसा लगता है कि न्यायाधीश ने अपने विवेक का इस्तेमाल किया है. पिछले साल 31 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने यूसुफ की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और वैधानिक जमानत की मांग करनेवाली उसकी याचिका ठुकराने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था.

42 वर्षीय यूसुफ मध्य कश्मीर के बड़गाम में कृषि सहायक के तौर पर पदस्थापित था जब 24 अक्तूबर 2017 को एनआईए ने उसे गिरफ्तार किया था. यूसुफ फिलहाल न्यायिक हिरासत में है. उसकी जमानत याचिका पिछले साल सात मार्च को निचली अदालत ने खारिज कर दी थी.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel