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Home National संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा – भारत की प्रासंगिक भूमिका के बगैर बहुध्रुवीय विश्व बनाना असंभव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा – भारत की प्रासंगिक भूमिका के बगैर बहुध्रुवीय विश्व बनाना असंभव

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा – भारत की प्रासंगिक भूमिका के बगैर बहुध्रुवीय विश्व बनाना असंभव

नयी दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र महासचिव के तौर पर भारत की अपनी प्रथम यात्रा पर आये एंतोनियो गुतारेस ने सोमवार को कहा कि भारत की काफी प्रासंगिक भूमिका के बगैर एक बहुध्रुवीय विश्व बनाना असंभव है. उन्होंने बहुधुव्रीय व्यवस्था में भारत के मजबूत स्तंभ बनने को लेकर भी सराहना की.

गुतारेस ने कहा कि भारत बहुध्रुवीय व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है. साथ ही, हम एक बहुध्रुवीय विश्व चाहते हैं, ऐसे में भारत की काफी प्रासंगिक भूमिका के बगैर एक बहुध्रुवीय विश्व बनाना असंभव है. यूएन हाउस के उदघाटन समारोह में गुतारेस ने कहा कि भारत एक वैश्विक शक्ति बन रहा है और वह विकास की दिशा में व्यापक रुख की हिमायत कर रहा है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को भारत के साथ काम करना चाहिए, इसकी विकास योजनाओं, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने में इसके नेतृत्व और सतत विकास लक्ष्यों का समर्थन करना चाहिए. गुतारेस यहां सोमवार को पहुंचे. उनकी यह यात्रा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर मनाये जानेवाले कार्यक्रमों के शुभारंभ के वक्त हो रही है. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और तीन दिवसीय यात्रा के दौरान जलवायु परिवर्तन तथा आतंकवाद जैसे प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर उनके चर्चा करने की संभावना है.

अपनी यात्रा से पहले संरा प्रमुख ने कहा कि भारत आतंकवाद का मुकाबला करने और हिंसक चरमपंथ को रोकने में संयुक्त राष्ट्र का एक अहम साझेदार है. यात्रा के दौरान वह महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन में भागीदारी करेंगे और मोदी से मंगलवार को मिलेंगे. वह इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक व्याख्यान भी देंगे. वह मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मिलेंगे और तीन अक्तूबर को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात करेंगे तथा ‘चैंपियन ऑफ अर्थ’ में शरीक होंगे. उसी दिन वह अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर जायेंगे और चार अक्तूबर को सुबह न्यू याॅर्क के लिए रवाना हो जायेंगे. गौरतलब है कि वह महासचिव चुने जाने से पहले जुलाई 2016 में भी भारत आये थे.

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