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Home National ‘आयुष्मान भारत” प्रचार का तरीका, योजना साबित होगी एक और जुमला : अरविंद केजरीवाल

‘आयुष्मान भारत” प्रचार का तरीका, योजना साबित होगी एक और जुमला : अरविंद केजरीवाल

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‘आयुष्मान भारत” प्रचार का तरीका, योजना साबित होगी एक और जुमला : अरविंद केजरीवाल

नयी दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार को शुरू की गयी स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ केवल प्रचार का तरीका (पीआर एक्सरसाइज) है जो एक और ‘जुमला’ साबित होगी. आप ने इस योजना को ‘एक और सफेद हाथी’ करार दिया है और आरोप लगाया है कि यह दिल्ली में 50 लाख में से केवल छह लाख परिवार को कवर करती है.

केजरीवाल ने आप के बयान के संदर्भ में ट्वीट करके कहा, ‘कृपया पढि़ए- आयुष्मान भारत प्रचार का एक और तरीका कैसे है जो एक और जुमला साबित होगा.’ आप ने अपने बयान में कहा कि उसका मानना है कि देश के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य योजना जरूरी है और आयुष्मान भारत ‘सार्वभौमिक योजना नहीं है और इसे इस तरह से बनाया गया है कि यह नाकाम होनी ही है.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रांची से इस योजना की शुरूआत की और इसे ‘गरीबों की सेवा में एक युगांतकारी पहल’ बताया है. इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध होगा। पूरे देश के 10 करोड़ 74 लाख परिवारों को इसका लाभ मिलेगा जिससे देश की कुल 50 से 55 करोड़ आबादी लाभान्वित होगी. इसे दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम माना जा रहा है.

नीति आयोग ने ‘आयुष्‍मान भारत’ को ‘सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधा’ बताया

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरूआत के साथ ही ‘सब के लिए स्वास्थ्य सुविधायें’ एक हकीकत बन गयी हैं. कुमार ने एक ट्वीट में कहा, ‘माननीय प्रधानमंत्री मोदी का ‘सब के लिये स्वास्थ्य सुविधा’ का सपना प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के शुरू होते ही हकीकत में तब्दील हो गया है. यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है.’

इस मौके पर अपोलो हॉस्पिटल्स के चेयरमैन प्रताप सी. रेड्डी ने कहा कि यह बेहतर सार्वजनिक हित की योजना है. उन्होंने कहा, ‘हम सभी इस योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे.’ रेड्डी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी इस योजना की रीढ़ है. यह संभावित फर्जीवाड़े को कम करेगी. इससे सुनिश्चित होगा कि योजना का लाभ केवल चयनित लाभार्थी को ही मिले. निजी क्षेत्र भी इसे अधिक अच्छे से अपनायेगा.

डेलॉइट इंडिया की सहयोगी अनुपमा जोशी ने कहा कि इस योजना के शुरू होते ही इस बात की संभावना बढ़ी है कि निजी क्षेत्र और गैर-सरकारी संगठन अस्पतालों का अतिरिक्त बुनियादी ढांचा उन क्षेत्रों में खड़ा करेंगे जहां अभी द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाएं भी मौजूद नहीं हैं. जोशी ने कहा इस योजना की सफलता के लिए डॉक्टर, नर्स जैसे क्लीनिकल स्‍टॉफ की जरूरत होगी. इसके अलावा दूसरे कुशल सहायक कर्मियों की भी जरूरत होगी. इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने होंगे.

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