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Home National भारत 32 साल पुराने समझौते का हवाला देकर पाकिस्तान से मांगेगा जैश आतंकवादी का ब्योरा

भारत 32 साल पुराने समझौते का हवाला देकर पाकिस्तान से मांगेगा जैश आतंकवादी का ब्योरा

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भारत 32 साल पुराने समझौते का हवाला देकर पाकिस्तान से मांगेगा जैश आतंकवादी का ब्योरा

नयी दिल्ली : भारत 32 साल पुराने राष्ट्रमंडल समझौते का हवाला देते हुए सुंजवां सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले के सरगना जैश ए मोहम्मद के कुख्यात आतंकवादी मुफ्ती वकास के बारे में पाकिस्तान से विस्तृत जानकारी मांगने की योजना बना रहा है.

भारत के इस कदम से सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1267 के तहत आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद और इसके सरगना मौलाना मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में ताजा अपील करने में मदद मिलेगी. भारत ने पहले इसके लिए संयुक्त राष्ट्र में अपील की थी लेकिन चीन ने अड़ंगा लगा दिया था.

केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तान से आग्रह करने के लिए आपराधिक मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर राष्ट्रमंडल समझौते के तहत संबंधित दस्तावेज तैयार किये जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत राष्ट्रमंडल देश ऐसे मुद्दों पर परस्पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं.

जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में 1986 में हुई राष्ट्रमंडल देशों के कानून मंत्रियों की बैठक में मूल रूप से इस समझौते को स्वीकार किया गया था. अधिकारियों ने बताया कि इस समझौते का हवाला देते हुए भारत पाकिस्तान से मुफ्ती वकास के बारे में विस्तृत ब्योरा मांगेगा.

जम्मू कश्मीर के अवंतीपुरा इलाके में इस साल मार्च में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में वकास मारा गया था. उन्होंने बताया कि इस विस्तृत ब्योरे में वे फोन नंबर भी शामिल हैं जिनपर 10 फरवरी को सुंजवां सैन्य शिविर पर आतंकवादी हमले के पहले और बाद में वकास ने फोन किया था. इस हमले में छह सैनिक शहीद हो गए थे जबकि एक आम नागरिक की भी मौत हो गयी थी.

हमले में तीन आतंकवादी भी मारे गए थे. अधिकारियों ने बताया कि 2011 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में राष्ट्रमंडल देशों के कानून मंत्रियों की बैठक में हरारे समझौते में हुए संशोधन का हवाला देते हुए, अगर जरूरी हुआ तो, भारत वीडियो कॉल के माध्यम से संभावित गवाहों के बयान की रिकॉर्डिंग के विवरण की भी मांग करेगा.

सिडनी में राष्ट्रमंडल कानून मंत्रियों ने 2011 में दूरसंचार और डाक वस्तुओं को बीच में रोक कर जांच करने, इलेक्ट्रानिक निगरानी, जांच एवं न्यायिक प्रक्रियाओं के दौरान लाइव वीडियो लिंक का उपयोग और परिसंपत्ति की वसूली से संबंधित कुछ नए प्रावधानों में सहयोग की परिकल्पना करते हुए हरारे समझौते में संशोधन को अपनाया था.

पाकिस्तानी नागिरक वकास ने 2017 में घुसपैठ कर कश्मीर घाटी में प्रवेश किया था. वह जैश ए मोहम्मद का अभियान कमांडर था. सुंजवां सैन्य शिविर पर हुए आतंकवादी हमला का सरगना होने के साथ ही वकास पिछले साल दक्षिण कश्मीर के लेथपुरा इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस के शिविर पर 30 और 31 दिसंबर की दरम्यानी रात हुए हमले में भी शामिल था.

अधिकारियों के अनुसार वह अभियान प्रमुख के तौर पर काम करता था और उसने फिदाइन अथवा आत्मघाती हमलावरों को दक्षिण कश्मीर के त्राल इलाके से जम्मू रवाना किया था.

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