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भाजपा के लिए दक्षिण भारत का ”प्रवेश द्वार” क्यों है कर्नाटक ?

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भाजपा के लिए दक्षिण भारत का ”प्रवेश द्वार” क्यों है कर्नाटक ?

नयी दिल्ली : कर्नाटक में 222 विधानसभा सीटों के लिए आज वोटिंग है. चुनाव नतीजों का एलान 15 मई को होगा. कर्नाटक में कुल 224 सीटें हैं, लेकिन दो सीटों पर बाद में वोटिंग होगी. सीधा टक्कर कांग्रेस और बीजेपी के बीच है और देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस की भूमिका यहां किंगमेकर की होगी. अगर कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस जीत दर्ज कर लेती है, तो आने वाले चुनावों में यह पार्टी के लिए ऑक्सीजन का काम करेगी.

कांग्रेस की क्षेत्रीय नेतृत्व जहां – जहां मजबूत रही है, वहां पार्टी को हाल के दिनों में अच्छी कामयाबी हासिल हुई है. पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने शानदार वापसी की. वहीं राजस्थान में सचिन पायलट मजबूत नेता माने जाते हैं. सिद्धारमैया भी कैप्टन अमरिंदर की तरह कर्नाटक में दिग्गज नेता माने जाते हैं और केंद्रीय नेतृत्व उन्हें पूरी छूट दे रखी है. लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी पूरी तरह सक्रिय रहे.

बीजेपी के लिए कर्नाटक है दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार

तमाम प्रयासों के बाद बीजेपी दक्षिण भारत में पैठ नहीं बना पायी है. पहली बार जब बीजेपी ने कर्नाटक में जीत दर्ज की तो राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि बीजेपी विंध्याचल पर्वत को फतह कर दक्षिण भारत के राज्यों तक पहुंच गयी है. कर्नाटक को बीजेपी दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार समझने लगी. जीत के बाद बीजेपी अब दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में सेंध लगाने की कोशिशों में जुटी थी. लेकिन तेजी से बढ़ रही बीजेपी को झटका तब लगा जब येदियुरप्पा भ्रष्टाचार के आरोप में फंसते चले गये.
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