अहमदाबाद : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रति अटूट निष्ठा एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से नजदीकी ने सरल सहज विजय रूपाणी को विधानसभा चुनाव में पार्टी को जैसे तैसे मिली जीत के बावजूद लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा दिया.रंगून में जन्मे रूपाणी स्कूल जीवन में ही आरएसएस की शाखा से जुड़ गये थे. वह बाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) से होते हुए भाजपा में पहुंचे.
कड़े मुकाबले वाले चुनाव प्रचार अभियान में वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा का चेहरा थे, लेकिन अपेक्षाकृत कम संख्या वाले जैन समुदाय के रूपाणी (61) ने राज्य में पार्टी मशीनरी को सही रास्ते पर रखा, अपनी सरकार के विरद्ध सत्ताविरोधी लहर को बेअसर किया तथा पाटीदार समुदाय के हिंसक आरक्षण आंदोलन में अपनी कुर्सी और सरकार को बचाया. पाटीदार समुदाय भाजपा का जनाधार रहा है. उन्होंने राज्य के कुछ हिस्सों में कृषि संकट तथा नोटबंदी एवं जीएसटी के चलते आयी आर्थिक मंदी को लेकर सरकार के विरूद्ध असंतोष पर काबू पाया. ये बातें मुख्यमंत्री के नाम की चर्चा के समय उनके पक्ष में गयीं.
