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उत्तराखंड किडनी रैकेट के तार विदेशों तक जुड़े होने का अंदेशा, पुलिस हुई और भी चौकन्नी

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उत्तराखंड किडनी रैकेट के तार विदेशों तक जुड़े होने का अंदेशा, पुलिस हुई और भी चौकन्नी

देहरादून : राजधानी देहरादून के लाल तप्पड़ क्षेत्र में एक धर्मार्थ अस्पताल से चलाये जा रहे किडनी रैकेट के तार विदेशों तक से जुड़े होने की बात सामने आने से उत्तराखंड पुलिस और चौकन्नी हो गयी है. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नेपाली फार्म तिराहे और भानियावाला के बीच गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल में गैरकानूनी रूप से निकाले जा रहे गुर्दों को ओमान जैसे समृद्ध देशों से आने वाले अमीर लोगों में टांसप्लांट किया जा रहा था और इसके लिये उनसे मोटी रकम वसूल की जा रही थी.

उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने इस बात को स्वीकार किया कि विदेशों से इस किडनी रैकेट के जुड़े होने की बात सामने आयी है लेकिन उन्होंने कहा कि अभी मामले की पड़ताल की जा रही है जिसके बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी. रतूड़ी ने कहा कि मामले की जांच के लिये एक विशेष टीम गठित की गयी है जो हर पहलू से तफ्तीश कर उसकी तह तक पहुंचेगी. इस टीम की कमान देहरादून जिले की पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सरिता डोभाल को सौंपी गयी है.

राज्य पुलिस प्रमुख रतूड़ी ने कहा, मामले की गंभीरता को देखते हुए मैंने निर्देश दिये हैं कि इसकी जांच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की अगुवाई में हो. मामले की जांच एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी सरिता डोभाल को दी गयी है. रतूड़ी ने कहा कि इस मामले में अभी तक एक गिरफ्तारी हुई है लेकिन चिकित्सकों तथा अस्पताल स्टाफ सहित इससे जुड़े अन्य लोगों को पकड़ने के लिये पुलिस की विभिन्न टीमें कई स्थानों पर भेज दी गयी हैं.

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तौर पर पता चला है कि कोई डाक्टर अमित तथा उसका पुत्र इस रैकेट को चला रहे थे, हालांकि, उनके नाम बदलकर छद्म नामों से काम किये जाने की बात भी सामने आयी है. रतूड़ी ने बताया कि यह भी पता चला है कि अस्पताल के मालिक ने यह अस्पताल लीज पर चलाने के लिये आरोपियों को दिया था और पुलिस मालिक की भूमिका की भी जांच करेगी.

इस मामले के कल हुए सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लाल तप्पड़ के जंगलों से मुंबई निवासी कथित दलाल जावेद को गिरफ्तार किया था. इस रैकेट का खुलासा होने तक कोलकाता निवासी महिला 30 वर्षीय कृष्णा दास और इसी उम्र के शेख ताज अली का एक-एक गुर्दा निकाला जा चुका था जबकि कोलकाता की ही 30 वर्षीया सुषमा और गुजरात के रहने वाले भाईजी भाई के गुर्दे अभी निकाले जाने थे.

ये सभी कथित गुर्दा डोनर्स आठ और नौ सितम्बर को अस्पताल पहुंचे थे. इन सभी को कोलकाता की एक दलाल महिला ने मोबाइल फोन देकर पहले दिल्ली भेजा. दिल्ली में किडनी रैकेट के अज्ञात लोगों से मुलाकात होने के बाद उन्होंने इनके मोबाइल फोन वापस ले लिये और इन्हें लाल तप्पड़ भेज दिया. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब गुर्दे देने के बाद तय रकम न मिलने पर कृष्णा और अली ने अस्पताल में हंगामा कर दिया और इसकी सूचना पास ही स्थित लाल तप्पड़ पुलिस चौकी तक पहुंच गयी.

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