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घरेलू हिंसा की शिकार महिला अलग घर की हकदार : कोर्ट

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घरेलू हिंसा की शिकार महिला अलग घर की हकदार : कोर्ट

नयी दिल्ली : घरेलू हिंसा की शिकार किसी महिला को सिर्फ इसलिए आवास भत्ता देने से मना नहीं किया जा सकता कि वह अपने माता-पिता के घर चली गयी है. आज एक सेशन कोर्ट ने यह बात कही और ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें घरेलू हिंसा की शिकार महिला को पति से अलग रहने पर आवास भत्ता देने से मना कर दिया गया था.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश कुमार शर्मा ने मजिस्ट्रेट कोर्ट को यह आदेश दिया है कि वह महिला की याचिका पर पुनर्विचार करे और उसके लिए आवास भत्ता का इंतजाम करवाये. यह समाज का दायित्व बनता है कि वह घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा उपलब्ध कराये.

महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए शादी का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य

कोर्ट ने महिला की याचिका पर सुनवाई की अनुमति देते हुए कहा कि एक शादीशुदा महिला और उसके छोटे बच्चे की जिम्मेदारी शादी के बाद माता-पिता की नहीं रह जाती है, इसलिए उक्त महिला के अलग घर लेकर रहने के अधिकार को खारिज नहीं किया जा सकता है.
महिला ने जो शिकायत दर्ज करायी है, उसके अनुसार उसे उसका पति शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करता था. अत: महिला ने अपनी रक्षा के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत सुरक्षा की गुहार लगायी है. पीड़ित महिला अपनी छोटी बच्ची के साथ अपने माता-पिता के साथ रह रही है और एक अलग आवास की मांग के लिए कोर्ट गयी थीं, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था.

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