-हरिवंश-
इस यात्रा में हाईटेक थ्रिल है.सेंटोजा पूरे दिन देखने लायक है. सूरज, समुद्र और रेत, संगीतमय फव्वारे. ऐतिहासिक गुफाए. सुंदर समुद्र का तट (बीच), म्यूजियम, किला, वाटर एडवेंचर (पानी में दौड़). प्रवेशद्वार पर ही किंवदंतियों से आयी 12 मंजिली मूर्ति है. दूर से शेर की तरह, पर ध्यान से देखने पर बिल्कुल भिन्न. उसके मुंह से फव्वारे में पानी आ रहा है. युवती गाइड बताती है कि अंदर से बाहर पानी बहने का संकेत है, समृद्धि और पूंजीगत आय. वर्चुअल रियलिटी सिनेमा, यह देखने से एहसास होता है कि आप दर्शक नहीं पात्र हैं, मजबूत दिल के लोग यह देखते हैं. ‘एशियन विलेज’ में तरह-तरह के एडवेंचर (साहसिक कारनामे) ‘डाल्फिन लगून’ में डालफिनों के स्तब्ध करनेवाले दृश्य.
बच्चों को चुंबन लेते, दौड़ते, गले मिलते डाल्फिन. ‘सेंटोजा आर्किड गार्डेंस’ में सुंदर, मन और नजर बांध लेनेवाले आर्किड फूल ‘फोर्ट सिल्वासो’ में म्यूजियम है. सिंगापुर का इतिहास जीवंत रूप में सामने है. हमारी गाइड ‘बून ही’ कहती हैं. हम अपना इतिहास सुरक्षित रखते हैं, ताकि हमारी नयी (वर्तमान) पीढ़ी और भविष्य की पीढ़ियां जान सकें कि हमारे पुरखे कैसे रहते थे.
यहां एक भी म्यूजियम ऐसा समृद्ध नहीं. गांधी जिस स्कूल में पढ़े, वह हाल में बंद हो गया. राहुल जी तिब्बत से लुप्त प्रात पांडुलिपियां लाये, अद्भुत पुराने ग्रंथों की, ज्ञान के भंडार, वे चुपचाप चोरी होकर पटना से विदेश चली गयीं. रोज म्यूजियमों से चोरी, मूर्तियों की तस्करी, ऐतिहासिक चीजों की बिक्री, कहा है हमारा आत्मगौरव? लगता है, अतीत में जीते हम अभिशप्त लोग हैं, जिनका कोई भविष्य नहीं, न सपने हैं, न संकल्प.
