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नालंदा विश्वविद्यालय में घूमने का लेना हो अनुभव तो जाइए बिहार म्यूजियम

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नालंदा विश्वविद्यालय में घूमने का लेना हो अनुभव तो जाइए बिहार म्यूजियम

चाइना के कलाकारों द्वारा बनायी जा रही है खूबसूरत गैलरी
पटना :
बिहार म्यूजियम में आप जल्द ही नालंदा विश्वविद्यालय में घूमने का अनुभव ले सकेंगे. यहां इतिहास की नयी ‘बी’ गैलरी बनाने का काम तेजी से जारी है. इतिहास दीर्घा ‘बी’ में शुंग, कुषाण, गुप्त तथा पाल चार महान राजवंशो के काल में मगध फला-फुला और समृद्ध हुआ, उसके बारे में दिखाया जायेगा. चीन से आये कलाकार यहां पांचवीं गैलरी बना रहे हैं.

बिहार म्यूजियम में आपको नालंदा विश्वविद्यालय के प्राचीन खंडहरों की प्रतिकृति देखने को मिलेगी जिसमें गुप्त काल की ईंट और वास्तुकला को दिखाया जायेगा. यह आपको विश्वविद्यालय का इतिहास तो बतायेगा ही, साथ ही साथ यह भी महसूस करायेगा जैसे कि आप विश्वविद्यालय में ही घूम रहे हों. इस गैलरी में मूल रूप से कुर्किहार और तेल्हाड़ा से मिली मूर्तियों, पुरावशेषों और विभिन्न काल के सिक्कों को भी प्रदर्शित करने की तैयारी चल रही है.

बिहार म्यूजियम प्रबंधन के मुताबिक एक महीने में इसे खोलने का टारगेट रखा गया है. यह अब तक की सबसे बड़ी गैलरी में से एक होगी जिसमें कुल 650 पुरावशेष प्रदर्शित होंगे.

किस दीर्घा में क्या है खास?
बिहार म्यूजियम की इतिहास दीर्घा ‘ए’ में मगध साम्राज्य में मौर्य वंश के शासन से सम्राट अशोक तक के शासन काल में जब बिहार सुशासन का केंद्र था उसे दिखाया गया है. वहीं ‘बी’ दीर्घा में गुप्त काल से लेकर पाल काल के राजवंशों ने मगध में जो स्थिरता स्थापित की और समाज को एक नयी सांस्कृतिक ऊर्जा प्रदान की, उसे दिखाया जायेगा. इसी दौरान बौद्ध धर्म ने भारत में अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त की. हिंदू धर्म को संहिताबद्ध किया गया, मंदिरों का निर्माण हुआ और पुराणों को लिपिबद्ध किया गया. नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी शिक्षण संस्थानों ने दुनिया भर के छात्रों और शिक्षकों को आकर्षित किया. इस दौरान समाज में घटित घटनाओं को पुरावशेषों, कलाकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है. जिसमें टेराकोटा, प्रस्तर प्रतिमा, सिक्के एवं धातु प्रतिमाएं हैं. वहीं इतिहास दीर्घा ‘सी’ में बिहार के मध्यकालीन इतिहास में घटित घटनाओं को पुरावशेषों कलाकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है. यह दीर्घा हमें विभिन्न सत्ताओं के स्थानांतरण से अवगत कराता है, जिसमें शेरशाह शूरी जैसे शासक ने अपने पांच साल के सुशासन को सदृढ़ किया. इस कालखंड के दौरान समाज में घटित घटनाओं को पुरावशेषों व कलाकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है. जिसमें वीदरी कला, चित्रों, प्रस्तर प्रतिमा, सिक्के एवं धातु प्रतिमाएं है. ‘डी’ दीर्घा में बिहार संग्रहालय की विशिष्ट कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है. ये कलाकृतियां बिहार के 2000 वर्षो के उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट कला और शिल्प कौशल के विकास को दर्शाती है. जिसमें मौर्य कालीन दीदारगंज यक्षी प्रमुख है, जो इस काल में कला की पराकष्ठा को दर्शाता है.

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