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गर्भवस्था के दौरान योग के फायदे

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गर्भवस्था के दौरान योग के फायदे


21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है. योग हमारे शरीर को न सिर्फ स्वस्थ रखता है, बल्कि मन भी शांत रखता है. यहां तक कि गर्भवस्था के दौरान भी योग महिलाओं के लिए फायदेमंद है. कहा जाता है की गर्भवस्था महिलाओं के जीवन का सबसे खास पल होता है, यह वह दौर होता है जब एक स्त्री पहली बार ममता की भावना को महसूस करती है. यह जीवन का अनमोल समय पल होता है. ऐसे में यह जरूरी है कि आप अपना और अपने सेहत का ख्याल रखें.

इस अवस्था में स्वस्थ रहना बहुत ही आवश्यक है ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी दिनचर्या में योग और व्यायाम को जरूर शामिल करें. योग न सिर्फ आपको स्वस्थ रखता है अपितु प्रसव के के दौरान मन व शरीर को भी केंद्रित रखने में भी मदद करता है. इस दौरान आमतौर पर होने वाली समस्याएं जैसे कब्ज और उल्टी में भी योग काफी लाभदायक है. प्रतिदिन योग करने से तनाव कम हो होता है और मन भी शांत रहता है. योग करते समय हमें कुछ बातों का ध्यान भी रखना चाहिए, योग शुरु करने से पहले किसी चिकित्सक या योग शिक्षक से सलाह अवश्य ले लें. अगर हो सके तो किसी ट्रेनर को रख लें. गर्भावस्था के दौरान सबसे महत्वपूर्ण है की महिलाएं सबसे आसान और धीरे-धीरे योग करें.

योगासन जो गर्भवस्था के दौरान फायदेमंद है

कोणासन: इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी लचीली रहती है और गर्भावस्था के दौरान होने वाली सबसे आम समस्या कब्ज से राहत मिलती है.

वीरभद्रासन: यह आसन शरीर को संतुलित रखता है साथ ही कंधों, पैरों और कमर के नीचे के हिस्सों को टोन करता है. इसके अलावा इस आसन से सहनशक्ति भी बढ़ जाती है जो की डिलवरी में काफी सहायक होती है.

त्रिकोणासन: त्रिकोणासन शारीरिक और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए यह आसन काफी महत्वपूर्ण है . यह कूल्हों को स्ट्ररेच और खोलने में मदद करता है, साथ ही कमर दर्द को भी दूर करता है.


बद्धकोणासन: इस आसन को करने से कूल्हों, पेट और पैर के बीच का भाग लचीला होता है. जांघ और घुटने को स्ट्ररेच करता है और थकान में काफी राहत प्रदान करता है.


शवासन: यह आसन शरीर की कोशिकाओं को ठीक रखता है और तनाव को दूर करता है, साथ ही यह आसन रक्तचाप को भी बैलेंस रखता है. इस आसन को खुद में ही दर्द निवारक माना जाता है.


योग निंद्रा:तनाव र चिंता को दूर करने के लिहाज से यह आसन काफी लाभदायक माना जाता है, यह आसन शरीर की कोशिकाओं को आराम पहुंचाता है, साथ ही डिलीवरी के लिए शरीर को तैयार भी करता है.


विपरीतकरनी आसन: पीठ दर्द को कम करने के लिए इस आसन को उपयोगी माना जाता है, इस आसन के कई अन्य फायदे भी हैं जैसे की इस आसन को करने से पेल्विक क्षेत्र तक रक्त के प्रभाव को सुधारने में सहायक है, इसके अलावा गर्भपात के सामान्य लक्षण एंकल और वेरिकोस नसों की सूजन को कम करता है.


योग हमारे शरीर के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह तो हमें पता है पर कुछ ऐसे योगासन है जिन्हें गर्भावस्था के दौरान नहीं करनी चाहिए. आइए जानते है कौन से ऐसे आसन हैं जिन्हें गर्भावस्था के दौरान करने से बचना चाहिए.

1. नौकासन

2. चक्रासन

3. विपरीत शलभासन

4. हलासन

5.भुजांगसन

6. अर्धमत्स्येंद्रासन

योगा के दौरान कुछ बातों का हमेशा ख्याल रखना चाहिए जैसे कियदि आप गर्भावस्था के शुरूआती महीने में है तो ऐसे आसन न करें जो मुश्किल हो और पेट के निचले हिस्से पर अधिक दबाव डालते हो,इसके अलावा इस दौरान आपको प्रत्येक आसन करने की कोई आवश्यकता नहीं है, हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार ही आसन करें.

गर्भावस्था के बीच के तीन महीनों के दौरान, थका देने वाले, ज्यादा फुर्तीले आसन नहीं करनी चाहिए. बीच के तीन महीनों के दौरान प्राणायाम व ध्यान पर ज्यादा समय लगाना चाहिए.गर्भावस्था के 10वें से 14वें हफ्ते तक कोई भी योगासन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह समय गर्भावस्था का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है.

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