[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home लाइफस्टाइल वृद्ध महिलाओं को मिला रंगोली केंद्र का सहारा

वृद्ध महिलाओं को मिला रंगोली केंद्र का सहारा

0
वृद्ध महिलाओं को मिला रंगोली केंद्र का सहारा

पहल. बेंगलुरु के स्लम एरिया में चल रहा अनोखा सेंटर

भारत में एकल परिवार कल्चर के दौर में बुजुर्गों की स्थिति दयनीय हो गयी है. वे उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं. बेंगलुरु की रंगोली महिला केंद्र ऐसी ही बुजुर्ग महिलाओं की मदद करता है.

सप्ताह के पांच दिन बेंगलुरु की बुजुर्ग महिलाएं पांच बजे सवेरे रंगोली महिला केंद्र आ जाती हैं. यहां आने वाली महिलाएं कहती हैं कि यहां आने के बाद उन्हें लगता है कि उनका भी कोई अस्तित्व है. एक अंग्रेजी साइट पर प्रकाशित खबर के अनुसार, अधिकांश भारतीय घरों में बूढ़ी हो चुकी महिलाएं हाशिए पर चली जाती हैं.

बड़े परिवारों में उन्हें बच्चों की देखभाल का जिम्मा दे दिया जाता है और उनकी कोई सुध भी नहीं लेता. देश में टूटता पारिवारिक ढांचा इसका उदाहरण है. सामाजिक जेंरोलॉजिस्टिस्ट निधि गुप्ता बताती हैं कि 60 वर्ष से अधिक की उम्र की महिलाओं को अपेक्षित जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ता है. 2011 की जनगणना में पाया गया कि भारत में लगभग 104 मिलियन बुजुर्ग हैं जो 60 वर्ष या उससे अधिक हैं, इनमें से 53 मिलियन महिलाएं हैं. इन महिलाओं को अपने जीवन साथी से कई बार अलग भी रहना पड़ता है.

2016 के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में 70 प्रतिशत से अधिक बुजुर्ग महिलाएं अपने बच्चों पर आर्थिक रूप से निर्भर रहती हैं. ग्रामीण भारत में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत के करीब है. गुप्ता बताती हैं कि ऐसे परिदृश्य में समुदाय को इन बुजुर्गों के बारे में सोचने की जरूरत है. रंगोली केंद्र, बेंगलुरु शहर के राजेंद्र नगर झुग्गी में वाइडब्ल्यूसीए द्वारा चलाया जाता है.

सामुदायिक विकास विंग की उषा इब्राहीम का कहना है कि युवा लड़कियां तो काम कर ही रहीं हैं. लेकिन हमारा ध्यान बुजुर्ग माताओं पर हैं. पांच साल पहले हमने इनके लिए सिलाई केंद्र खोला जहां ये महिलाएं 10:30 बजे से 1 बजे तक सेवा देती हैं. रंगोली केंद्र में आने वाली अधिकांश महिलाएं आसपास की विधवा हैं. वे एक दूसरे से बड़े प्यार से मिलती हैं.

जहां घर में उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है. वहां वे खुद को अपने बच्चों पर बोझ जैसा महसूस करती हैं. लेकिन केंद्र में, इन सभी को समान और सम्मान से देखा जाता है. वे यहां आने के बाद अपने पसंद का गाना गाती हैं, नाचती हैं, जो उन्हें पसंद हो वह काम करती हैं. इसके बाद वे पेपर बैग और गलीचा बनाती हैं, जिसे बाजार में बेचा जाता है.

आज हर घर में समस्या हैं, लेकिन कभी-कभी इन समस्याओं पर बात करने में मदद मिलती है. 80 वर्षीय मारिया सिल्वी को कहने के तो चार बेटे हैं लेकिन आज वह अकेले रहती है. चिनम्मा भी इसी उम्र की हैं.

वे अच्छी दोस्त हैं और बताती हैं कि यहां आकर लोगों से बात करके हम अपनी सभी समस्याएं भूल जाती हैं और हमें शांति मिलती है. रंगोली केंद्र ने सभी महिलाओं को रजिस्टर किया है उन्हें मासिक पेंशन देती है. वे अपने शिल्प की बिक्री से एक छोटा प्रतिशत सामाजिक कार्य में भी लगाते हैं. इसके साथ ही इन महिलाओं को घुमने के लिए पार्कों झीलों के दौरे पर भी ले जाया जाता है. उनके दिन का सबसे आकर्षण है उनका दोपहर का भोजन बिंस और अंडे दिये हैं. इब्राहीम बताती हैं कि कई महिलाओं को ऐसा लगता है कि उनके बच्चे उन पर आधारित हैं तो वे यह खाना घर भी ले जातीं हैं.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel