फैटी लिवर मरीज मुख्यत: इन्सुलिन रेसिस्टेंस होता है. इस अवस्था में शरीर इन्सुलिन बनाता तो है, पर कार्य अच्छे से नहीं कर पाता है. इससे गलूकोज की मात्रा शरीर में बढ़ जाती हैं, लिवर इस ग्लूकोज को वसा में बदल देता है. ओमेगा-3 फैटी एसिड मछली एवं मछली के तेल में, वेजिटेबल तेल, अखरोट, तीसी एवं पत्तेदार सब्जियों में यह पाया जाता है. यह इन्सुलिन को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है. फैटी लिवर को खत्म करने के लिए एंटीआॅक्सीडेंट का उपयोग किया जाता है. बेरी और सूर्यमुखी का बीज लिवर को नुकसान होने से बचाता है. अखरोट में विटामिन-इ की अच्छी मात्रा पायी जाती हैं, जो लिवर के लिए फायदेमंद है. कच्चा लहसुन इन्सुलिन के कार्य को बढ़ाता है एवं शरीर में जमा फैट को तोड़ता है. यौगिक कार्बोहाइड्रेट लेना चाहिए. कैंडी, सोडा और अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए.
फीवर एवं उल्टी रहने पर नसों से ग्लूकोज की मात्रा दी जाती है. जैसे ही मरीज मुंह से खाना शुरू हो, फलों का रस, नारियल पानी, हरी सब्जी का सूप, मधु इत्यादि दिया जाता है. जॉन्डिस मरीज के लिवर सेल को बनाने के लिए विटामिंस की मात्रा अधिक लेनी चाहिए. विटामिन सी 500 एमजी, विटामिन-K 10 एमजी एवं विटामिन बी कॉम्पलेक्स प्रतिदिन आहार में लेना चाहिए. ऐसे मरीज जो मुंह से आहार लेने में सक्ष्म हों, उन्हें सूजी का खीर, चावल का खीर, चपाती, चावल, बिना मलाईवाला दूध, आलू, फलों का रस, चीनी, गुड़, दही, गैर उत्तेजक पेय पदार्थ देना चाहिए. दाल, बीन्स, मीट, मछली, मुर्गा, मीट सूप, बेकरी पदार्थ, सूखा मेवा, मसाले, चटनी, पापड़, अचार, एल्कोहल, तली भुनी चीजें, क्रीमवाला दूध आदि नहीं लेना चाहिए. मरीज को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना चाहिए.
