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BREXIT पर टाटा सहित भारत के इन कंपनियों पर पड़ेगा असर

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BREXIT पर टाटा सहित भारत के इन कंपनियों पर पड़ेगा असर

कारोबार डेस्क

ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से बाहर होने के फैसले के बाद दुनिया भर के बाजार में उठा-पटक का दौर जारी है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अपना पद छोड़ने की घोषणा की है. वहीं भारत के शेयर बाजार में दवाब बढ़ने की आशंका जतायी जा रही है.ब्रिटेन और भारत के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध है. देश के कुछ बड़ी कंपनियों का ब्रिटेन व यूरोपियन यूनियन में बहुत बड़ा निवेश है. इनमें टाटा स्टील, टाटा मोटर्स की सहायक लैंड रोवर्स, महिंद्रा, मदरसन सूमी, टेक महिंद्रा जैसी कंपनियां शामिल हैं.
ब्रेक्सिट से टाटा कंपनी को दो तरह के नुकसान होने के अनुमान है. यूरोप में इसकी बिक्री घट सकती है व अवरोधों का समाना करना पड़ सकता है.वहीं टाटा कंपनी इस फैसले के प्रभावों से निपटने के लिए तैयारी कर चुका है. टाटा कंपनी ने अपने कर्मचारियों को पत्र लिखकर कहा कि ईयू से ब्रिटेन का निकलना कंपनी के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है, कलपुर्जे व उत्पादों की बिक्री में काफी परेशानी होगी. कंपनी ने कहा कि ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन का संबंध हमारे लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा था. यूरोपियन यूनियन अब तक हमारा सबसे बड़ा बाजार रहा है. कंपनी ने कर्मचारियों को यह भी लिखा था कि अब हमें ईयू के नियमों पर भी ध्यान देना होगा.
आईटी कंपनियों पर भी पड़ेगा असर
ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने से देश के 108 अरब डालर के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग को कुछ समय के लिए अनिश्चितता की स्थिति से जूझना पड सकता है. आईटी उद्योगों के संगठन नास्कॉम ने आज यह बात कही. नास्कॉम ने कहा कि दीर्घावधि में यह कुल मिलाकर चुनौतियों तथा अवसर दोनों की स्थिति होगी, क्योंकि ब्रिटेन उसके जरिये यूरोपीय संघ के बाजारों तक पहुंच के नुकसान की भरपाई करने का प्रयास करेगा. यूरोप भारतीय आईटी-बीपीएम उद्योग के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार है. आईटी उद्योग की करीब 100 अरब डालर की निर्यात आय में यूरोप की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है.
इस बाजार में ब्रिटेन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ब्रिटेन नास्कॉम सदस्यों की यूरोप में गतिविधियों के एक बडे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. कई सदस्य यूरोपीय संघ में आगे और निवेश के लिए ब्रिटेन को गेटवे के रूप में इस्तेमाल करते हैं. नास्कॉम ने कहा कि ब्रिटिश पौंड में गिरावट से कई मौजूदा अनुबंध घाटे वाले हो जाएंगे और उन पर नए सिरे से बातचीत करने की जरूरत होगी. नास्कॉम ने कहा कि अनुबंध से बाहर निकलने या भविष्य में उसमें बने रहने के लिए होने वाली बातचीत को लेकर अनिश्चितता से बडी परियोजनाओं के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होगी. टीसीएस ने इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की जबकि इन्फोसिस ने कहा कि यह शांति का समय है.

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