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Home Business ONGC और RIL की कठिन खनिज-गैस का दाम 60% तक बढ सकता है

ONGC और RIL की कठिन खनिज-गैस का दाम 60% तक बढ सकता है

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ONGC और RIL की कठिन खनिज-गैस का दाम 60% तक बढ सकता है

नयी दिल्ली : ओएनजीसी और रिलायंस इंडस्टरीज जैसी कंपनियों को दुर्गम और अधिक चुनौतीपूर्ण इलाकों से गैस उत्खनन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्येश्य से सरकार ऐसे क्षेत्रों की प्राकृतिक गैस मूल्य में करीब 60 प्रतिशत तक की वृद्धि का विचार कर रही है. घरेलू गैस की कीमत फिलहाल अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे गैस निर्यातक देशों की कीमतों के औसत के आधार पर तय की जाती हैं. पर इन कीमतों पर गहरे समुद्री क्षेत्र या अधिक चुनौतीपूर्ण इलाकों में गैस की खोज और निकासी का कारोबार आकर्षक नहीं रह गया है. ऐसे में इस तरह के क्षेत्र से प्राप्त गैस के लिए सरकार ने वैकल्पिक ईंधन – नाफ्था तथा ईंधन तेल और आयातित एलएनजी – की औसत कीमत के आधार पर तय करने की योजना बनायी है.

भारत में गैस का मूल्य फिल्हाल 3.82 डालर प्रति एमएमबीटीयू है जो अप्रैल में घटकर 3.15 डालर प्रति एमएमबीटीयू हो जाएगा. यह दर गहरे समुद्र में खोजों को विकसित करने के लिए काफी नहीं है. आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने एक साक्षात्कार में कहा कि यह दर उत्खनन को प्रोत्साहन देने के लिए काफी नहीं है इसलिए सरकार ने गहरे समुद्र, अति गहरे समुद्र और उच्च तापमान, उच्च दबाव वाले क्षेत्र में गैस खोजन के लिए नाफ्था, ईंधन तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की औसत आयातित कीमत के आधार मूल्यनिर्धारण की योजना बनायी है.

इस तरीके से एलएनजी, ईंधन मूल्य और नाफ्था की मौजूदा दर के आधार पर गैस मूल्य छह डालर प्रति एमएमबीटीयू से अधिक बैठेगा. दासने कहा, ‘गैस मूल्य को तीन इंधन स्रोतों – नाफ्था, ईंधन तेल और एलएनजी की औसत कीमत से जोडा जाएगा. गहरे समुद्र और मुश्किल क्षेत्रों में उत्खनन तथा खोज करने वालों को तीनों इंधन स्रोतों का आयातित औसत मूल्य के बराबर मिलेगा. यह नियंत्रित दर नहीं होगा जो अन्य के लिए प्रभावी होगी बल्कि तीनों की औसत दर होगी.’

सरकारी स्वामित्व वाली ओएजीसी, रिलांयस इंडस्टरीज और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कार्प (जीएसपीसी) की केजी बेसिन में दो दर्जन से अधिक उत्खनन क्षेत्र सही मूल्य की उम्मीद में अटके हुए हैं. उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल इस बात पर फैसला करेगा कि नाफ्था, ईंधन तेल और एलएनजी के सामान्य औसत या भारांकित औसत पर विचार किया जाएगा. वित्त मंत्री अरण जेटली ने 2016-17 के आम बजट में दो चरणों में गैस मूल्य निर्धारण में स्वतंत्रता की घोषणा की थी.

उन्होंने बजट भाषण में कहा था, ‘भारत में तेल एवं गैस समेत प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है. हालांकि, उनकी खोज और उत्खनन तथा दोहन का काम हमारी क्षमता से कम हो रहा है.’ उन्होंने कहा था, ‘नये खोज और जिन क्षेत्रों में उत्पादन शुरू होना बाकी है उनमें सोच-समझकर विपणन स्वतंत्रता प्रदान करने और वैकल्पिक ईंधन के आयातित मूल्य के आधार पर पूर्व निर्धारित अधिकतम सीमा तय करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है.’ आर्थिक सर्वेक्षण में भी घरेलू गैस के लिए बाजार आधारित मूल्य निर्धारण की सिफारिश की गयी थी.

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