नयी दिल्ली : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय जल्द राष्ट्रीय ऑफसेट नीति पर कैबिनेट की मंजूरी लेगा. इसके तहत विदेशी कंपनियों के लिए उनके सरकार या सार्वजनिक उपक्रम से अनुबंध के एक हिस्से की खरीद घरेलू विनिर्माताओं से करना अनिवार्य होगा. नीति के मसौदे में प्रस्ताव किया गया है कि सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों को 300 करोड रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री करने वाली विदेशी कंपनियों को इसके एक निश्चित हिस्से के बराबर खरीद घरेलू विनिर्माताओं से करनी होगी.
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सचिवों की समिति की बैठक में नीति के मसौदे पर व्यापक विचार विमर्श किया गया. वाणिज्य मंत्रलय ने कुछ संबंधित मंत्रालयों द्वारा उठाए गए मुद्दे को सुलझाया है.’ अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय ऑफसेट नीति के मसौदे को जल्द कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रीय ऑफसेट नीति का मकसद विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि को प्रोत्साहन देना है. इससे निवेश आकर्षित करने, नयी प्रौद्योगिकी, कच्चे माल व परिसंपत्तियों के अधिग्रहण में मदद मिलेगी.
साथ ही इससे भुगतान संतुलन की स्थिति सुधरेगी और शोध एवं विकास क्षमता बढेगी व निर्यात में इजाफा होगा. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा तैयार नीति के मसौदे के अनुसार ऑफसेट प्रतिबद्धता का न्यूनतम मूल्य आयात की अनुमानित लागत का 30 प्रतिशत होगा. इसका मतलब है कि कंपनियों को इतने प्रतिशत सामान स्थानीय विनिर्माताओं से खरीदना होगा. सूत्रों ने बताया कि यह नीति केंद्र सरकार के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की खरीद दोनों पर लागू होगी.
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