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चिट फंड, लाटरी टिकट की बिक्री अब सेवा कर के दायरे में

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चिट फंड, लाटरी टिकट की बिक्री अब सेवा कर के दायरे में

नयी दिल्ली : चिंट फंड और लाटरी पर मिलने वाली ईनामी राशि जल्दी ही कम हो सकती है. सरकार ने लाटरी टिकट की बिक्री और चिट फंड को सेवा कर के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा कल पेश केंद्रीय बजट के अनुसार चिटफंड चलाने वाले (फोरमैन) तथा लाटरी टिकट बेचने वालों तथा वितरणकर्ताओं को सेवा कर से मिली छूट वापस ले ली गई है. वित्त विधेयक, 2015 में इस तरह की गतिविधियों से मिलने वाली आय पर कर की दर का भी उल्लेख किया गया है.

वह दर जिस पर 2015-16 में लाटरी या क्रासवर्ड पजल्स, घुड दौड तथा कार्ड गेम से मिलने वाली राशि पर स्रोत पर कर कटौती होगी. लाटरी, क्रासवर्ड पजल्स, कार्ड गेम्स जैसे खेलों तथा घुड दौड जीत से कमायी गयी राशि पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगेगा. बजट दस्तावेज में कहा गया है कि चिट फंड सेवाओं से प्राप्त आय पर छूट को वापस लिया जा रहा है.

परिणामस्वरुप चिटफंड चलाने वालों को फीस, कमीशन के रूप में प्राप्त पूरी धनराशि पर सेवाकर देना होगा और वे उसपर केंद्रीय मूल्यवर्धित कर (सेनवैट) में क्रेडिट लेने के हकदार होंगे. लाटरी के संदर्भ में बजट में वितरकों को लाटरी टिकट की बिक्री करने वाले मार्केटिंग एजेंटों को सेवा कर से मिली छूट को भी वापस लेने का प्रस्ताव किया है.

बजट दस्तावेज में कहा गया है, ‘कानून की मंशा वितरकों व लॉटरी बिक्री करने वाले एजेंटों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर सेवा कर लगाने की है.’ शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा उपकर को समाहित करते हुये सेवा कर की दर 12.34 प्रतिशत से बढकर 14 प्रतिशत कर दी गई है.

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