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बजट को उद्योग समर्थक कहना, पूरी तरह गलत : सरकार

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बजट को उद्योग समर्थक कहना, पूरी तरह गलत : सरकार

नयी दिल्ली : बजट प्रस्तावों को कंपनियों के पक्ष में तथा गरीबों के खिलाफ बताये जाने को लेकर हो रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए सरकार ने आज कहा कि यह विचार सरासर गलत और आधारहीन है. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा, ‘वे (आलोचक) पूरी तरह गलत हैं. यह आधारहीन, गुमराह करने वाला है और कहीं भी आंकडों में इसकी पुष्टि नहीं होती.’

वह इस आलोचना का जवाब दे रहे थे कि वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा कल संसद में पेश राजग सरकार का पहला पूर्ण बजट कंपनियों के पक्ष में तथा गरीबों के खिलाफ है. पूर्व वित्त मंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि बजट में कंपनी कर मौजूदा 30 प्रतिशत से घटाकर अगले चार साल में 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है.

इससे कंपनियों को अगले चार साल तक हर साल 20,000 करोड रुपये के बराबर लाभ होगा. सिन्हा के अनुसार कंपनी कर को अगले चार साल में 30 प्रतिशत से कम कर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव राजस्व के लिहाज से नुकसानदायक नहीं है, क्योंकि ऐसा करने के साथ ही कंपनियों को मिलने वाली विभिन्न प्रकार की छूट समाप्त होगी.

उन्होंने कहा, ‘फिलहाल वे (कंपनियां) 30 प्रतिशत कर नहीं दे रहे हैं. वास्तव में वे 23 प्रतिशत कर दे रहे हैं. कंपनियों को जो छूट मिल रही है, उसे हम समय के साथ समाप्त करने जा रहे हैं और उनका कर 25 प्रतिशत होने जा रहा है.’ सिन्हा ने कहा कि इस कदम का मकसद कर बढाना नहीं बल्कि गडबडियों और असुविधाओं को दूर करना तथा कर प्रणाली को आसान और विश्वसनीय एवं कारोबार करने को आसान बनाना है.

उन्होंने कहा, ‘इस लिहाज से मैं इस आलोचना को पूरी तरह खारिज करता हूं कि यह बजट कंपनियों के लिये है. यह बजट लोगों के लिये है.’ उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा लाभान्वित मध्यम वर्ग होगा. मध्यम वर्ग के संदर्भ में जयंत सिन्हा ने कहा कि कुल छूट 4.4 लाख तक करने का प्रस्ताव किया गया है.

इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति की आय 7 लाख रुपये है और वह सभी प्रकार की कर छूट लेता है तो उसे कोई कर नहीं देना होगा. उन्होंने कहा, ‘यह रोजगार उन्मुख बजट है. हमने संपत्ति कर को समाप्त किया और उसकी जगह धनाढ्य लोगों पर 2 प्रतिशत का अतिरिक्त अधिभार लगाया है जिससे 9,000 करोड रुपये प्राप्त होंगे. इसीलिए मैं इस आलोचना को खारिज करता हूं.

यह गलत और गुमराह करने वाला है. सेवा कर वृद्धि के कारण कीमतों पर पडने वाले प्रभाव के बारे में सिन्हा ने कहा, ‘सेवा कर 12.3 प्रतिशत से बढाकर 14 प्रतिशत किया गया है जो मामूली वृद्धि है. लेकिन तथ्य यह है कि सेवा कर में वृद्धि के मुकाबले जो अन्य लाभ हैं, वह कहीं अधिक है.’

उन्होंने कहा कि सेवा कर दर बढाने के पीछे व्यवस्था को वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की दिशा में आगे बढाना है. उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से लोगों को काफी फायदा होगा. राजकोषीय मजबूती के काम को एक साल पीछे खिसकाने के बारे में पूछे गये सवाल पर सिन्हा ने कहा कि नयी सरकार ने राजकोषीय घाटे को 2014-15 में कम कर जीडीपी का 4.1 प्रतिशत पर लाने का काफी चुनौतीपूर्ण कार्य किया है.

उन्होंने कहा, ‘आपको पता होगा कि एक साल पहले राजकोषीय घाटा 4.7 प्रतिशत पर था जिसे 2013-14 में हासिल किया गया, और जिस तरह से इसे हासिल किया गया, उन आंकडों की गुणवत्ता, वित्तीय आंकडों की जादूगरी जो इसमें की गई उससे वास्तव में यह 4.7 नहीं बल्कि 5.5 प्रतिशत था. हम इसे वास्तव में कम करके 4.1 प्रतिशत पर लाये हैं.’

सिन्हा ने कहा, ‘यह बेहतर ढंग से किया गया है, बजट आर्थिक वृद्धि बढाने वाला है और देश के बेहतर हित में हैं खासतौर से रोजगार की बात की जाये तो उस लिहाज से बेहतर है.’

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