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Home Business स्‍पेक्‍ट्रम निलामी के लिए ट्राई ने की 10% अधिक मूल्‍य की सिफारिश

स्‍पेक्‍ट्रम निलामी के लिए ट्राई ने की 10% अधिक मूल्‍य की सिफारिश

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स्‍पेक्‍ट्रम निलामी के लिए ट्राई ने की 10% अधिक मूल्‍य की सिफारिश

नयी दिल्ली : भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मोबाइल ग्राहकों में बढते इंटरनेट उपयोग को देखते हुए 2जी स्पेक्ट्रम के रुप में चर्चित 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड में अगले दौर की स्पेक्ट्रम नीलामी के लिये करीब 10 प्रतिशत ऊंचा आधार मूल्य रखने की सिफारिश की है. ट्राई ने 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड के लिये प्रति मेगाहर्ट्ज 2,138 करोड रुपये का मूल्य रखने की सिफारिश की है. दूरसंचार नियामक ने प्रीमियम श्रेणी के 900 मेगाहर्ट्ज बैंड में 3,004 करोड रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज बैंड मूल्य रखने का सुझाव दिया है.

इस बैंड में 1800 मेगाहर्ट्ज के मुकाबले लगभग दोगुना से अधिक एरिया कवर होता है. दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लाइसेंस की अवधि समाप्त होने तथा ग्राहकों के लिये सेवाएं जारी रखने को ध्यान में रखते हुए ट्राई ने यह सिफारिश की है कि फरवरी 2015 में निर्धारित नीलामी से पहले और रेडियो तरंगे उपलब्ध होनी चाहिए. 1800-मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम के लिये कीमत 2,138 करोड रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज रखने का सुझाव दिया गया है जो फरवरी 2014 की नीलामी से कम है. फरवरी 2014 में सरकार को 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम में 2,270.4 करोड रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज की बोली प्राप्त हुई थी.

नियामक ने कहा कि चूंकि पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं होने से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के लिये स्पेक्ट्रम नीलामी नहीं होगी, इससे नीलामी के लिये रखे जाने वाले स्पेक्ट्रम की कीमत घटकर 2,138 करोड रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज रह जाएगी. हालांकि, लाइसेंस सर्विस एरिया (एलएसए) में रेडियो तरंगों की आगामी नीलामी के लिये जिस कीमत की सिफारिश की गयी है, वह पिछली नीलामी की तुलना में अभी भी करीब 10 प्रतिशत उंची होगी. मोबाइल इंटरनेट का उपयोग बढने तथा पूर्व की अवधि के मुकाबले औसतन डेटा उपयोग अधिक रहने के आधार पर कीमत उंची है.

महंगे 900 मेगाहर्ट्ज बैंड में 22 सेवा क्षेत्रों में से 18 के लिये 3,004 करोड रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज बैंड कीमत का सुझाव दिया है क्योंकि यह बैंड जम्मू कश्मीर, दिल्ली, मुंबई तथा कोलकाता सेवा क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है. मौजूदा दूरसंचार कंपनियों एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया सेल्यूलर तथा रिलायंस कम्युनिकेशंस के पास उपलब्ध 900 मेगाहर्ट्ज में स्पेक्ट्रम नीलामी की जानी है. इनके लाइसेंस 2015-16 में समाप्त हो रहे हैं. 900 मेगाहर्ट्ज बैंड में से करीब 184 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी की जा सकती है.

जबकि 1800 मेगाहर्ट्ज में सरकार ने 104 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी का प्रस्ताव किया है. इसमें वे स्पेक्ट्रम शामिल हैं जो उन लाइसेंसधारकों के पास है जिनका लाइसेंस 2015-16 में समाप्त हो रहा है. साथ ही इसमें फरवरी की नीलामी में नहीं बिक सका स्पेक्ट्रम भी शामिल है. सरकार 8.2 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम रक्षा बैंड के रुप में रखना चाहती है. इससे नीलामी के लिये केवल 104 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध होगा.

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