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Home Business थाल से सब्जियां गायब! लग रहा है पाव का भाव, मुर्गा से महंगा मिल रहा धनिया पत्ता

थाल से सब्जियां गायब! लग रहा है पाव का भाव, मुर्गा से महंगा मिल रहा धनिया पत्ता

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थाल से सब्जियां गायब! लग रहा है पाव का भाव, मुर्गा से महंगा मिल रहा धनिया पत्ता

रांची : सब्जियों के बढ़े दाम ने रसोइघरों का बजट बिगाड़ दिया है. आम आदमी की थाली से हरी सब्जियां गायब होने लगी हैं. कीमतों में उछाल का हाल यह है कि आम-ओ-खास हर कोई परेशान है. कम आय वाले परिवार के लिए तो हरी सब्जियां खाना मुश्किल ही नहीं, दूभर हो गया है. दुकानदारों व उपभोक्ताओं के अनुसार, पहले लोग जहां सब्जियाें की खरीदारी किलो में करते थे, अब पाव भर में खरीदने में ही पसीने छूटने लगे हैं. आलू से लेकर प्याज भी दो से तीन किलो एक बार में खरीद कर रख लेते थे. आज स्थिति यह है कि आधा किलो या पाव भर से ही लोग काम चला रहे हैं.

कई घरों में तड़का लगना हुआ बंद
सब्जी महंगी होने का असर घरों में दिखने लगा है, कई घरों में तड़का लगना भी बंद हो गया है. लोगों का कहना है कि प्याज इतनी महंगी है कि बिना तड़का के काम चलाना पड़ रहा है. अधिकांश घरों से सलाद भी गायब हो गया है. खीरा मिल भी गया, तो प्याज अलग से लोगों ने खाना बंद कर दिया है.

प्याज 70-80, तो आलू बिक रहा 30 रु
आलू, प्याज से लेकर हरी सब्जियां काफी महंगी हैं. लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर क्या खाएं और क्या न खाएं. पुराना सफेद आलू 20 रुपये और पुराना लाल आलू 24 रुपये किलो व नया आलू 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. प्याज 70-80 रुपये किलो मिल रहा है.

मुर्गा से महंगा मिल रहा धनिया पत्ता
मुर्गा से भी महंगा धनिया पत्ता मिल रहा है. खुदरा बाजार में मुर्गा 130 रुपये, तो धनिया पत्ता 140 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. इसी प्रकार लहसुन 200 रुपये और अदरक 120 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. बींस 40 रुपये, शिमला मिर्च 60 रुपये और गाजर 80 रुपये प्रति किलो मिल रहा है.

फूल गोभी मिल रही 80 रुपये प्रति किलो
खुदरा बाजार में फूलगोभी 70 रुपये और करेला 60-80 रुपये मिल रहा है. भिंडी 60 रुपये, मटर 80 रुपये मिल रहा है. जबकि खीरा 40 रुपये और टमाटर 30 रुपये प्रति किलो है. कई बार लोग हरी सब्जियों की जगह चना, काबली चना और राजमा से भी काम चला रहे हैं.

अब खाली रहता है फ्रिज
लाइन टैंक रोड निवासी भारती मुंडा कहती हैं कि हरी सब्जियां सहित आलू और प्याज महंगी होने का असर यह है कि बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है. घर में कोई मेहमान आ जाये, तो कम-से-कम दो सब्जी बनानी पड़ती है. पहले जहां सब्जियों से फ्रिज भरा रहता था, आज यह लगभग खाली रह रहा है.

हरी सब्जियों का प्रयोग कम हो गया
थड़पखना निवासी सुप्रिया चौरसिया कहती हैं कि घर में कुल सदस्यों की संख्या 10 है. हम लोग आलू की सब्जी से ही काम चला रहे हैं. हरी सब्जी का प्रयोग बहुत कम हो गया है. घर में खाना बनाते समय कई बार सोचना पड़ रहा है कि आखिर दाल, चावल, रोटी के अलावा सब्जी में क्या बनाएं.

एक हरी सब्जी आधा या पाव ही ले रही हूं
मोरहाबादी निवासी सोना मंडल कहती हैं कि सब्जी महंगी होने से घर में काफी परेशानी हो रही है. सब्जी में प्याज भी सोच-समझ कर डालना पड़ रहा है. एक हरी सब्जी एक किलो लेने की जगह आधा किलो या एक पाव ही ले रही हूं. इसमें आलू की मात्रा अब बढ़ गई है.

सब्जी के बढ़े भाव ने परेशानी बढ़ा दी है
एचबी रोड निवासी राखी देवी कहती हैं कि आज घर में सब्जी बनाना मुश्किल लग रहा है. आखिर कौन-सी सब्जी बनाएं और कितना प्याज या लहसुन डाली जाये कि स्वाद भी मिले. इसी माथापच्ची में हर दिन बीत रहा है. समझ ही नहीं आता कि आखिर कब सब्जी की कीमतें कम होंगी.

मनपसंद सब्जी खरीदना मुश्किल
चर्च रोड निवासी नीलोफर कहती हैं कि बाजार में 200 रुपये ले जाने पर भी मनपसंद सब्जी नहीं खरीद पा रही हूं. जो भी सब्जी खरीद रही हूं, वह आधा किलो या एक पाव ही ले रही हूं. बस, आलू ही दो किलो या इससे अधिक खरीद रही हूं. इतनी महंगाई है कि अब ताे खाना खाना भी दूभर हो गया है.

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