[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Business PMC बैंक के बर्खास्त एमडी ने गड़बड़ी के लिए सतही ऑडिट को ठहराया जिम्मेदार

PMC बैंक के बर्खास्त एमडी ने गड़बड़ी के लिए सतही ऑडिट को ठहराया जिम्मेदार

0
PMC बैंक के बर्खास्त एमडी ने गड़बड़ी के लिए सतही ऑडिट को ठहराया जिम्मेदार

मुंबई : पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के बर्खास्त प्रबंध निदेशक (एमडी) जॉय थॉमस ने बैंक में गड़बड़ी के लिए ऑडिटरों को दोषी ठहराते हुए आरोप लगाया है कि समय की कमी के चलते उन्होंने बैंक के बही खातों का सतही ऑडिट किया. भारतीय रिजर्व बैंक को 21 सितंबर को लिखे पांच पन्ने के पत्र में थॉमस ने बैंक के वास्तविक एनपीए और एचडीआईएल के कर्ज के बारे में वास्तविक जानकारी छिपाने में शीर्ष प्रबंधन समेत निदेशक मंडल के कुछ सदस्यों की भूमिका को कबूल किया है. हालांकि, थॉमस ने आरबीआई को भेजे पत्र में किसी ऑडिटर के नाम का जिक्र नहीं किया है.

बैंक की 2018-19 ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 2010-11 से बैंक के तीन ऑडिटर (लकड़वाल एंड कंपनी, अशोक जयेश एंड एसोसिएट्स और डीबी केतकर एंड कंपनी) थे. इन ऑडिटरों ने भेजे गये ई-मेल का 24 घंटे बाद भी जवाब नहीं दिया है. थॉमस ने पत्र में दावा किया है कि वैधानिक ऑडिटरों ने पीएमसी बैंक के बही-खातों का सतही तौर पर ऑडिट किया गया था, क्योंकि बैंक बढ़ रहा था.

थॉमस ने दावा किया कि चूंकि बैंक के व्यवसाय में वृद्धि हो रही थी, ऑडिटरों ने समय के कमी के कारण सभी खातों के पूरे परिचालन की जांच-पड़ताल की बजाय सिर्फ बढ़े हुए कर्ज और उधार की जांच-पड़ताल की. इस बैंक ने अपने कुल कर्ज का का बहुत बड़ा हिस्सा केवल एक कंपनी समूह एचडीआईएल को दे रखा है. इस वर्ष सितंबर के अंत में इस समूह पर करीब 6500 करोड़ रुपये का बकाया था.

थॉमस ने कहा है कि प्रतिष्ठा गिरने के डर से बैंक ने अपने बड़े खातों के बारे में रिजर्व बैंक को 2008 से कोई जानकारी नहीं दी थी. उन्होंने लिखा है कि संचालक मंडल, ऑडिटरों और विनियामकों को बड़े खातों की जानकारी इस नहीं दी गयी, क्योंकि इससे प्रतिष्ठा गिरने का डर था. 2015 से पहले कुछ बड़े कर्जदारों की ज्यादातर सूचना शाखा स्तर पर ही रखी जाती थीं और उनके खातों का ब्योरा सामने नहीं आता था. स्थिति तब बदली जब रिजर्व बैंक ने 2017 में बैंक द्वारा दिए जाने वाली उधार/कर्ज की राशियों का ब्योरा मांगना शुरू किया.

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel