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Home Business ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने कहा : नीलामी में स्पेक्ट्रम की बिक्री नहीं होने से सरकार को हुआ 5.4 लाख करोड़ का नुकसान

ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने कहा : नीलामी में स्पेक्ट्रम की बिक्री नहीं होने से सरकार को हुआ 5.4 लाख करोड़ का नुकसान

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ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने कहा : नीलामी में स्पेक्ट्रम की बिक्री नहीं होने से सरकार को हुआ 5.4 लाख करोड़ का नुकसान

नयी दिल्ली : उद्योग संगठन ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) ने यह दावा किया है कि पिछली नीलामियों में स्पेक्ट्रम बिक नहीं पाने की वजह से सरकार को 5.4 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है. बीआईएफ ने सरकार से आगामी 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी में रेडियो तरंगों की पर्याप्त उपलब्धता और ‘उचित कीमत’ सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. बीआईएफ ने कहा कि 5जी स्पेक्ट्रम का आरक्षित मूल्य काफी ऊंचा है. अन्य देशों की तुलना में यह चार गुना तक अधिक है. इसमें तत्काल संशोधन करने की जरूरत है.

बीआईएफ ने बयान में कहा कि भारत में स्पेक्ट्रम की नीलामी या सफलता सिर्फ एक कारक कीमत पर निर्भर करती है. कीमत से ही अधिकतम बिक्री और महत्तम प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ हासिल किया जा सकता है. ऐसे में, सिर्फ लघु अवधि के वित्तीय लाभ पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जाना चाहिए. उद्योग संगठन का यह बयान डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) की इस सप्ताह होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले आया है.

इस बैठक में स्पेक्ट्रम नीलामी के विभिन्न तौर तरीकों और स्पेक्ट्रम की कीमत को अंतिम रूप दिया जाना है. 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी चालू वित्त वर्ष में ही होने की उम्मीद है. बयान में कहा गया है कि मोबाइल स्पेक्ट्रम की प्रत्येक विफल नीलामी के कई प्रभाव होते हैं. इसमें स्पेक्ट्रम तो बिकता नहीं है, साथ ही यह बेकार पड़ा रहता है, जिससे मूल्यवान आर्थिक लाभ गंवा दिया जाता है.

अक्टूबर, 2016 में हुई स्पेक्ट्रम नीलामी में 1300 मेगाहर्ट्ज या 59 फीसदी स्पेक्ट्रम नहीं बिक पाया था. इस नुकसान का गणित समझाते हुए बीआईएफ ने कहा कि 2010 से नीलामी में सिर्फ 60 फीसदी स्पेक्ट्रम ही बिक पाता है. वर्ष 2016 में सक्रिय मोबाइल कनेक्शनों की संख्या 76.2 करोड़ थी. इन मोबाइल उपभोक्ताओं को लाइसेंसी कंपनियों को आवंटित 3800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के जरिये सेवाएं दी जा रही थी. यदि यह स्पेक्ट्रम बिक जाता, तो 27.8 करोड़ अतिरिक्त कनेक्शनों को मोबाइल सेवाएं दी जा सकती थीं.

बीआईएफ ने कहा कि यदि दूरसंचार घनत्व 10 फीसदी बढ़ने पर सकल घरेलू उत्पाद 1.9 फीसदी पड़ता है, तो बेकार पड़े स्पेक्ट्रम की वजह से अनुमानित नुकसान 5.40 लाख करोड़ रुपये बैठता है.

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