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Home Business RBI ने रेपो रेट 0.35 फीसदी घटायी, लगातार चौथी बार रेट में कटौती से नौ साल के न्यूनतम स्तर पर नीतिगत दरें, EMI घटेंगी

RBI ने रेपो रेट 0.35 फीसदी घटायी, लगातार चौथी बार रेट में कटौती से नौ साल के न्यूनतम स्तर पर नीतिगत दरें, EMI घटेंगी

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RBI ने रेपो रेट 0.35 फीसदी घटायी, लगातार चौथी बार रेट में कटौती से नौ साल के न्यूनतम स्तर पर नीतिगत दरें, EMI घटेंगी

नयी दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने लगातार चौथी बार रेपो रेट में कटौती की है. इस बार 0.35 फीसदी की कटौती की गयी है, जिसके बाद रेपो रेट 1.10 फीसदी तक घट चुका है. इससे आने वाले दिनों में होम लोन और कार लोन सहित दूसरी तरह के लोन की ब्याज दरें घटेंगी, जिससे आपकी इएमआइ में भी कमी आयेगी. केंद्रीय बैंक ने लगातार चौथी बार अपनी मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट में कमी का एलान किया है. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा कि रेपो दर में 0.35 प्रतिशत की कटौती संतुलित है. 0.25 प्रतिशत की कटौती अपर्याप्त रहती.

पहले से ही उम्मीद जतायी जा रही थी कि इस बार मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक एक चौथाई फीसदी (0.25 फीसदी) की कटौती कर सकता है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने इस बार 0.35 फीसदी की कमी की है. 0.35 फीसदी की कमी के बाद अब रेपो रेट 5.40 फीसदी पर आ गया है. इससे पहले केंद्रीय बैंक ने तीन बार रेपो रेट में कमी की थी. हर बार उसने एक चौथाई फीसदी (0.25 फीसदी) की कमी की थी.

इस तरह तीन बार की कटौती के बाद रेपो रेट पहले ही 0.75 फीसदी नीचे आ गया था. आज की कटौती के बाद लगातार चार बार की कुल कटौती के बाद यह 1.10 फीसदी घट चुका है. अगस्त की मौद्रिक पॉलिसी की खास बात यह है कि केंद्रीय बैंक ने अपनी एकोमोडेटिव पॉलिसी को बरकरार रखा है.

इस बार मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सभी सदस्यों ने रेपो रेट में कटौती के पक्ष में मतदान किया. एमपीसी के छह सदस्य हैं. इस कटौती के साथ केंद्रीय बैंक ने बैंकों को लोन की ब्याज दरों में कमी करने का स्पष्ट संकेत दिया है. श्री दास ने कहा कि उन्हें अपेक्षा है कि सितंबर से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन के लिए बैंक अपने लोन की ब्याज दरों में कटौती करेंगे.

श्री दास ने कहा कि कर्ज पर ब्याज दर को उच्च स्तर पर बनाये रखने को लेकर बैंकों के बीच कोई साठगांठ नहीं है. रिजर्व बैंक को भरोसा है कि ऋण मांग बढ़ रही है और आर्थिक वृद्धि रफ्तार पकड़ रही है. रिजर्व बैंक के गवर्नर ने उम्मीद जतायी कि सरकार आर्थिक वृद्धि में सुधार लाने के लिए और कदम उठायेगी.

उन्होंने कहा कि वास्तविक ब्याज दर पर गौर करने का सही समय नहीं है. आरबीआइ का जोर उत्पादन अंतर को पूरा करने पर है. उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा नरमी चक्रीय है, संरचनात्मक नहीं. श्री दास ने आश्वस्त किया कि रिजर्व बैंक सभी जरूरतंद क्षेत्रों को पर्याप्त नकदी उपलब्ध करायेगा.

जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य घटाया

आरबीआइ ने वित्त वर्ष 2020 के लिए जीडीपी ग्रोथ लक्ष्य 7 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है. उसका कहना है कि 2020 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है. वहीं, इस अवधि में खुदरा महंगाई 3.6 फीसदी रह सकती है, जबकि अक्टूबर-मार्च में खुदरा महंगाई के 3.5 से 3.7 फीसदी रहने का अनुमान है.

केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.3 से 7.5 फीसदी रह सकती है. वहीं, इसी वित्त वर्ष की पहली छमाही में इसके 5.8 से 6.6 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है. ट्रेड वॉर और ग्लोबल सुस्ती का असर भारतीय इकॉनोमी पर देखने को मिल रहा है.

खरीफ फसलों की बुआई में कमी

इकॉनोमी पर शक्तिकांत दास ने कहा कि खरीफ फसलों की बुआई में 6.6 फीसदी की कमी दिखी है. कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी सुस्ती का माहौल दिख रहा है. हालांकि, खाद्य और तेल के अलावा महंगाई काबू में है, जिसको देखते हुए वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 3.1 फीसदी पर कायम है.

आरबीआइ के गवर्नर ने कहा कि दुनिया भर में महंगाई दर नियंत्रण में है. इसलिए दुनिया भर के सेंट्रल बैंक ब्याज दरें घटा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.

क्या है रेपो रेट : रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक अपने कर्ज की जरूरतें पूरी करने के लिए केंद्रीय बैंक से पैसा उधार लेते हैं.

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