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Home Business बरसात के दौरान बढ़ सकते हैं सब्जियों के दाम, सितंबर खुदरा मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि का अनुमान

बरसात के दौरान बढ़ सकते हैं सब्जियों के दाम, सितंबर खुदरा मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि का अनुमान

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बरसात के दौरान बढ़ सकते हैं सब्जियों के दाम, सितंबर खुदरा मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि का अनुमान

मुंबई : इस साल मॉनसून सामान्य रहने के अनुमान के बीच खाद्य पदार्थों विशेषकर सब्जियों की कीमतों में तेजी को देखते हुए रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान मामूली बढ़ाकर 3.0-3.10 फीसदी कर दिया.

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इससे पहले अप्रैल की समीक्षा में रिजर्व बैंक ने इस अवधि के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 2.90-3.0 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. हालांकि, दूसरी छमाही यानी अक्टूबर, 2019 से मार्च, 2020 के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति का पुर्वानुमान 3.50-3.80 फीसदी से घटाकर 3.40-3.70 फीसदी कर दिया गया.

रिजर्व बैंक ने दूसरे द्वैमासिक मौद्रिक नीति बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति का रुख कई कारकों से प्रभावित होगा. सबसे पहले, सब्जियों के भाव में गर्मियों के कारण आने वाली तेजी अनुमान से पहले आ गयी. हालांकि, सर्दियों में इसमें कमी देखने को मिलेगी. रिजर्व बैंक ने कहा कि ताजी सूचनाओं से कई खाद्य पदार्थों में व्यापक आधार पर कीमतों में तेजी का पता चलता है. इससे खाद्य मुद्रास्फीति के निकट भविष्य में ऊपर जाने के संकेत मिलते हैं. कच्चा तेल में उथल-पुथल जारी रहने वाला है.

आरबीआई की समीक्षा में कहा गया है कि इन कारकों नीतिगत दर में हालिया कटौती के प्रभाव तथा 2019 में सामान्य मॉनसून के पूर्वानुमान पर गौर करें, तो खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को संशोधित कर 2019-20 की पहली छमाही के लिए 3.0-3.10 फीसदी और दूसरी छमाही के लिए 3.40-3.70 फीसदी कर दिया गया है. इसके साथ ही, जोखिम व्यापक स्तर पर संतुलित रहने का अनुमान है.

मुद्रास्फीति पर रिवर्ज बैंक का अनुमानद मॉनसून को लेकर अनिश्चितता, सब्जियों के भाव में बेमौसम तेजी, कच्चा तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और घरेलू कीमतों पर इसके असर, भू-राजनीतिक तनाव, वित्तीय बाजार का उथल-पुथल और राजकोषीय परिदृश्य पर आधारित है. रिजर्व बैंक ने कहा कि घरेलू एवं बाह्य मांग परिस्थितियों में उल्लेखनीय नरमी आने से अप्रैल में खाद्य एवं ईंधन को छोड़ मुद्रास्फीति में 0.60 प्रतिशत की कमी देखने को मिली. इससे साल के बचे समय के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को नीचे रखा गया है.

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