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Home Business अप्रैल से सितंबर तक 25.32 करोड़ निकाले गये E-way bill, सिस्टम को बनाया गया बेहतर

अप्रैल से सितंबर तक 25.32 करोड़ निकाले गये E-way bill, सिस्टम को बनाया गया बेहतर

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अप्रैल से सितंबर तक 25.32 करोड़ निकाले गये E-way bill, सिस्टम को बनाया गया बेहतर

नयी दिल्ली : वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) प्रणाली को बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने वाली कंपनी वस्तु एवं सेवाकर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने बुधवार को कहा कि ई-वे बिल पोर्टल को सरल बनाने के लिए इसमें कुछ बदलाव किये हैं, जिससे भेजी जाने वाली खेप के प्रकार के अनुसार ही फॉर्म बनाये जायेंगे. इससे गलतियां कम होंगी. छह महीने में इस प्रणाली से कुल 25.32 करोड़ ई-वे बिल निकाले जा चुके हैं.

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जीएसटीएन की विज्ञप्ति के अनुसार, प्रणाली में ‘डाक्यूमेंट टाइप’ में जिस श्रेणी के वस्तु की आपूर्ति का विकल्प चुना जायेगा, वही फॉर्म उसमें तैयार होगा. इसमें जीएसटी के तहत पंजीकृत कारोबारियों के बीच वस्तु का लेन-देन हो अथवा गैर-पंजीकृत से पंजीकृत कारोबारी के बीच का सौदा हो, फॉर्म चयनित वर्ग का ही होगा.

इसके साथ ही, यदि वस्तु की आपूर्ति जॉबवर्क के लिए है, तो ‘डाक्यूमेंट टाइप’ में जॉबवर्क होने पर उसमें इस्तेमाल होने वाला फॉर्म ही प्रणाली में जनरेट होगा. इससे फॉर्म भरने में गलती नहीं होगी. देश में एक अप्रैल से ई-वे बिल प्रणाली शुरू होने के बाद से 30 सितंबर, 2018 तक कुल मिलाकर 25.32 करोड़ ई-वे बिल निकाले जा चुके हैं.

निकाले गये बिलों से अंतरराज्यीय वस्तु परिवहन के लिए 12.14 करोड़ और राज्य के भीतर वस्तुओं की ढुलाई के लिए 13.12 करोड़ ई-वे बिल प्रणाली से निकाले गये. देश में अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र में जीएसटी व्यवस्था को एक जुलाई 2017 से लागू किया गया. जीएसटी के तहत कुल मिलाकर एक करोड 03 लाख से अधिक करदाता पंजीकृत हैं.

विज्ञप्ति के अनुसार, ई-वे बिल पोर्टल में एक और बदलाव यह किया गया है कि कुल चालान मूल्य 10 करोड़ रुपये अथवा अधिक भरा जाता है, तो पोर्टल से अपने आप ही बिल निकालने वाले को एसएमएस के जरिये सतर्क करने का संदेश पहुंच जायेगा. इससे चालान मूल्य में गलती को दूर किया जा सकेगा. ई-वे बिल पोर्टल में अब तक कुल 24.53 लाख करदाताओं ने पंजीकरण कराया है, जबकि 31,232 ट्रांसपोर्टर इस प्रणाली से जुड़े हैं.

गौरतलब है कि जीएसटी प्रणाली के तहत 50 हजार रुपये से अधिक का वस्तु एक स्थान से दूसरे स्थान को भेजने पर ई-वे बिल लेना अनिवार्य कर दिया गया है. इस व्यवस्था की शुरुआत जीएसटी व्यवस्था के तहत कर चोरी रोकने के लिए की गयी.

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