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Home Business Trade war छेड़ना अमेरिका को पड़ सकता है भारी, चीन के बाद ईयू-कनाडा समेत भागीदार देशों ने दी चुनौती

Trade war छेड़ना अमेरिका को पड़ सकता है भारी, चीन के बाद ईयू-कनाडा समेत भागीदार देशों ने दी चुनौती

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Trade war छेड़ना अमेरिका को पड़ सकता है भारी, चीन के बाद ईयू-कनाडा समेत भागीदार देशों ने दी चुनौती

व्हिसलर (कनाडा)/ बीजिंग (चीन) : इस्पात और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों के आयात पर ऊंचा शुल्क लगाने की अमेरिका के ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ यूरोपीय संघ और कनाडा सहित उसके कई प्रमुख भागीदार देशों ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है. यूरोपीय संघ ने पहली जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी फैसले को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चुनौती दी है. कनाडा भी अमेरिका के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में चला गया है. इसके साथ ही, यूरोपीय संघ, कनाडा और मैक्सिको ने अमेरिकी शुल्कों के खिलाफ जवाबी शुल्क लगाने की चेतावनी भी जारी की है.

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इन कार्रवाइयों और धमकियों के बीच अमेरिका ने ऐसे कुछ देशों देशों के वित्त मंत्रियों के साथ कनाडा में बैठकें शुरू की है, जो व्यापार में उसके बड़े भागीदार हैं. इसी बीच बीजिंग से चीन के सरकारी मीडिया ने खबर जारी की है कि अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस वहां पहुंच चुके हैं. रॉस की यह यात्रा दुनिया की इन दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संभावित व्यापार युद्ध को टालने के प्रयासों का हिस्सा है. अमेरिका ने 24 वर्ष पुराने उत्तर अटलांटिक मुक्त व्यापार समझौते (नाफ्टा) को भंग कर सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते करने की संभावना की चर्चा छेड़ी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने कार्यालय व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि नाफ्टा की जगह कनाडा और मैक्सिको से अलग-अलग समझौते करना बेहतर हो सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के ये दोनों पड़ोसी ‘दो बहुत अलग-अलग तरह के देश हैं ‘ और इनके लिए एक ही तरह के व्यापार के नियमों को और लम्बे समय तक नहीं रखा जा सकता.

उन्होंने कहा कि मैं आप से साफ-साफ कहूं, तो मैं नाफ्टा की जगह कनाडा और मैक्सिको से अलग-अलग व्यापार समझौते करने से परहेज नहीं करूंगा. ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरिजा मे ने कहा कि वह अमेरिकी निर्णय से ‘बहुत निराश’ हैं. उन्होंने फिर कहा कि अमेरिका को ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के खिलाफ इस्पात और एल्युमीनियम शुल्क नहीं लगाने चाहिए. उन्होंने इन शुल्कों को अनुचित करार दिया.

यूरोपीय संघ ने अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की धमकी देते हुए कहा है कि वह अमेरिका की बर्बन व्हिस्की , मोटरसाइकिल , ब्ल्यू जीन पर जवाबी शुल्क लगा सकता है. निशाने पर रखी जाने वाली इन प्रस्तावित वस्तुओं का अमेरिका से यूरोपीय संघ में सालाना आयात 2.8 अरब यूरो यानी 3.3 अरब डॉलर का है. यूरोपीय संघ की व्यापार आयुक्त सेसिलिया मामस्ट्राम ने कहा कि ‘ व्यापार करने वाले अगर नियम से नहीं चले, तो व्यवस्था ध्वस्त हो जायेगी. यही कारण है कि हम अमेरिका और चीन के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में जा रहे हैं.

अमेरिका ने कनाडा और यूरोपीय संघ के खिलाफ धातु शुल्क मार्च में ही लगाया था, पर उन्हें कुछ समय के लिए उससे मोहलत दी थी. मोहलत की मियाद वृहस्पतिवार आधी रात को खत्म हो गयी. अमेरिका सबसे ज्यादा इस्पात कनाडा और एल्युमीनियम यूरोपीय संघ से मंगाता है. कनाडा के राष्ट्रपति जस्टिन त्रूदो, जर्मनी की चांसलर एंजिला मर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रों अमेरिकी शुल्क नीति की आलोचना कर चुके हैं. मैक्रों ने ट्रंप से फोन पर बातचीत में इन शुल्कों को ‘गैर-कानूनी ‘ बताया.

उन्होंने कहा कि इसे शुल्क कार्रवाइयों का चक्रवात शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है. कनाडा ने अमेरिका के खिलाफ 12.8 अरब डॉलर की वस्तुओं पर जवाबी शुल्क लगाने की योजना का ऐलान किया है. इन हालात में अमेरिका और कनाडा सहित सात सदस्यों के समूह के वित्त मंत्रियों की ओटावा में बैठक शुरू हुई. इसमें अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन एमन्यूचिन को सदस्य देशों की तरफ से कड़े सवालों का सामना करना पड़ा. उन्हें यह उलाहना भी सुननी पड़ी कि ट्रंप के रवैये से विश्व अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो गया है और इससे सभी देशों में रोजगार के अवसर मारे जायेंगे.

कनाडा के वित्त मंत्री बिल मोरन्यू ने कहा कि जी 7 की इस बैठक में बातचीत ‘ कठिन ‘ होगी. हम यह समझाना चाहते हैं कि इन उपयों से कोई भला नहीं होने वाला है. फ्रांस के वित्त मंत्री ब्रूना ली मायर ने कहा कि यूरोप ‘ऐसे हालात में बात नहीं करेगा, जहां हमारी सर पर एक बंदूक तनी हो.’ इस बैठक में जर्मनी, इटली और जापान के अधिकारी भी शामिल हैं.

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