बी-पॉजिटिव
मुझे पक्का विश्वास हो चला था कि शायद मेरे जीवन के दिन बस अब गिनती के हैं. मेरा इलाज जारी था, लेकिन शुरुआती चार महीने बहुत ही ज्यादा निराशा के थे. उसी दौरान मैंने खूब किताबें पढ़नी शुरू की. मैंने प्रसिद्ध साइकिलिस्ट लांस आर्मस्ट्रांग और क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह की ऑटोबायोग्राफी भी पढ़ी. इन किताबों को पढ़ने से मुझे बहुत हौसला मिला. मेरे सोचने का नजरिया बदलने लगा. मैं सोचने लगा कि ये दोनों भी तो मेरी तरह कैंसर से जूझ रहें थें. आज बिल्कुल भले-चंगे हैं. ये अगर कैंसर को मात दे सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं? कीमोथेरेपी के दौरान मैं ज्यादातर बिस्तर में ही रहता था, लेकिन किताबें पढ़ना, लिखना और सिनेमा देखना मेरे प्रिय शगल बन चुके थें. लंबी शारीरिक और मानसिक जद्दोजहद के बाद कैंसर को अपने सकारात्मक सोच और परिवार के लोगों के सहयोग से मैंने मात दे दिया था. मैं अपने प्रेरक स्टीफन विलियम हॉकिंग के बारे में सोचता था कि कैसे 19 वर्ष की उम्र में डॉक्टर्स ने उनकी असाध्य बीमारी एस्ले के कारण दो साल का समय भी नहीं दिया था. आज हॉकिंग 45 वर्ष के हैं और व्हील चेयर में रहने के बावजूद दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाते हैं.
