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‘गगनयान’ परियोजना की डिजाइन समीक्षा जनवरी में पूरी होगी

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‘गगनयान’ परियोजना की डिजाइन समीक्षा जनवरी में पूरी होगी

हैदराबाद : इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने कहा है कि भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन ‘गगनयान’ के लिए डिजाइन समीक्षा का कार्य इस महीने पूरा हो जायेगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुछ दिन पहले ही इस परियोजना को मंजूरी दी है.

मंत्रिमंडल ने पिछले शुक्रवार को 9,023 करोड़ रुपये की लागत वाले इस कार्यक्रम को मंजूरी दी थी. इस मिशन का उद्देश्य पृथ्वी की निचली कक्षा में तीन सदस्यीय दल को भेजना और उन्हें धरती पर निर्दिष्ट स्थान पर सुरक्षित वापस लाना है.

इसरो अध्यक्ष एवं अंतिरक्ष विभाग के सचिव सिवन ने कहा, ‘हमने इस पर कार्य करने के लिए एक टीम लगायी है. डिजाइन की समीक्षा चल रही है और हम जनवरी के पहले 15 दिनों में यह समीक्षा पूरा कर लेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘इसके बाद आगे इस अभियान में प्रगति जारी रहेगी. पहला मानव रहित मिशन दिसंबर 2020 में होगा, इसके बाद मानव रहित मिशन जुलाई 2021 में और इसके बाद दिसंबर 2021 में मानव मिशन होगा.’

इसरो के अधिकारियों ने कहा कि दो मानवरहित उड़ानें प्रौद्योगिकी और मिशन प्रबंधन पहलुओं पर भरोसा हासिल करने के लिए होंगी.

सिवन ने कहा, ‘सुरक्षा बेहद जरूरी है. हमें मानवों को अंतरिक्ष में ले जाना है और उन्हें दोबारा सुरक्षित वापस लाना है. यह बेहद जरूरी और चुनौतीपूर्ण है, जो कि हम कर रहे हैं. हम ऐसा कर सकने में सक्षम होंगे.’

अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए इसरो ने आवश्यक तकनीक विकसित कर ली है. सिवन ने कहा, ‘ज्यादातर काम पूरे हो चुके हैं.’

इस मिशन के लिए बेहद जरूरी तकनीकी चीजों में चालक दल मॉड्यूल प्रणाली, चालक दल बचाव प्रणाली और पर्यावरण नियंत्रण और जीवन रक्षा प्रणाली हैं. अंतिरक्ष एजेंसी ने पहले ही सफलतापूर्वक चालक दल मॉड्यूल का परीक्षण कर लिया है.

सिवन ने संकेत दिया कि चालक दल को प्रशिक्षण देने के लिए विदेशी विशेषज्ञता की मदद ली जा सकती है. उन्होंने कहा, ‘मुख्य रूप से चालक दल प्रशिक्षण के मामले में 2022 की समयसीमा का पालन करने के लिए हमारे पास भारत में सुविधा मौजूद नहीं है. हमें चालक दल प्रशिक्षण के उद्देश्य से विदेशी एजेंसियों के पास जाना होगा.’

जब उनसे पूछा गया कि चालक दल प्रशिक्षण के लिए इसरो रूस से संपर्क करेगा या फ्रांस से तो उन्होंने कहा, ‘हम सभी लोगों से अधिकतम मदद लेना चाहते हैं, हम खुद को किसी एक देश तक सीमित नहीं करना चाहते.’

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