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Home archive महिला सिपाही की मौत मामला: जब घर वाले पहुंचे रोते-बिलखते तो डीएसपी ने कहा, मर गयी तो क्या हुआ…ले जाओ बांसघाट

महिला सिपाही की मौत मामला: जब घर वाले पहुंचे रोते-बिलखते तो डीएसपी ने कहा, मर गयी तो क्या हुआ…ले जाओ बांसघाट

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पटना : वैसे तो पुलिस लाइन में रहने वाले प्रशिक्षु व अन्य पुलिसकर्मी पहले से बहुत प्रताड़ित थे. पुलिस लाइन के मुंशी व डीएसपी का व्यवहार बेहद खराब होने की शिकायत की बात सामने आती रही है. लेकिन शरीर पर वर्दी चढ़ाने के बाद अनुशासन व ड्यूटी पुलिसकर्मियों की मजबूरी भी है और अावश्यकता भी.
पर शुक्रवार को जो हुआ वह कहीं से भी जायज नहीं था. पुलिस सूत्रों कि मानें तो पहले तो बीमार चल रही महिला सिपाही सबिता पाठक को छुट्टी नहीं दी गयी. जबकि पुलिस अस्पताल के डॉक्टर ने उसे सात दिनों के बेडरेस्ट को लिखा था.
बीमारी और दवा-इलाज के बीच महिला सिपाही की मौत के बाद जब घर के लोग रोते-बिलखते पुलिस लाइन पहुंचे और डीएसपी लाइन मोहम्मद मसलेहुद्दीन से शिकायत किया कि आपने छुट्टी नहीं दी, इसलिए इसकी मौत हो गयी है, लेकिन उन्होंने कोई संवेदना नहीं दिखायी ऊपर से बेहद बेतुका लफ्ज बोला.
महिला पुलिस सूत्रों की मानें तो डीएसपी ने कहा कि बीमारी से मरी है न, तो क्या हो गया, ले जाओ बांसघाट. इस पर घरवाले भड़क गये. मृत महिला सिपाही की साथी भी गुस्से में आ गयीं. यह बात तेजी से पुलिस लाइन में फैली और विवाद की स्थिति बन गयी. शुरुआत इसी बात को लेकर हुई, लेकिन चूंकि पुराना गुबार था इसलिए हिंसक तौर पर सामने आया.
डीएसपी पर है आरोप, नहीं देते थे परवाना
पुलिस लाइन के पुलिसकर्मियों की डीएसपी के खिलाफ गंभीर शिकायत सामने आयी है. दरअसल कुछ पुलिसवालों का कहना है कि डीएसपी पूरी तरह से मनमानी करते थे. कोई पुलिसकर्मी अगर एसएसपी या अन्य अधिकारियों से छुट्टी लेकर जब पुलिस लाइन पहुंचता था तो उसे परवाना नहीं दिया जाता था. छुट्टूी के आवेदन पर पुलिस पदाधिकारियों के हस्ताक्षर होने के बाद भी उसे फर्जी हस्ताक्षर बता कर भगा दिया जाता था.
इसके बाद पुलिसकर्मी छुट्टी के लिए वरीय पदाधिकारियाें के पीछे दौड़ते रहते थे. कई तो ऐसे मामले हैंजिनमें हाथ मेें प्लास्टर लेकर पुलिसकर्मी पहुंचते थे, बावजूद उन्हें छुट्टी नहीं मिलती थी. इस तरह के व्यवहार से पुलिसकर्मी अंदर ही अंदर घुट रहे थे. इसलिए इनका गुस्सा इतना हिंसक रूप से सामने आया.
लंबे समय से जमे हैं पुलिस लाइन में
डीएसपी पुलिस लाइन लंबे समय से पटना पुलिस लाइन में जमे हैं. पुलिसकर्मियों का कहना है कि दारोगा से डीएसपी बन गये लेकिन उनका ट्रांसफर नहीं हुआ.
शुरू से ही पुलिस लाइन में रहने के कारण उनका व्यवहार पुलिसकर्मियों के लिए रफ हो गया था. अंदरखाने चर्चा है कि पॉलिटिकल कनेक्शन होने के कारण न तो उनको हटाया गया और न ही उनके धौंस-रुतबे में कमी आयी.
छुट्टी के नाम पर आर्थिक व यौन शोषण की भी है चर्चा
दरअसल पुलिस लाइन में मौजूद पुलिसकर्मियों को छुट्टी लेने में कई तरह की मुश्किलें आती थीं. सूत्रों की मानें तो छुट्टी के लिए चढ़ावा लिया जाता था.
पैसा नहीं देने पर टरकाया जाता था. कुछ लोग पैसा देकर सेटिंग कर लिये थे. वहीं महिला पुलिसकर्मियों के यौन शोषण की बात होती रही है. हालांकि कोई कंप्लेन नहीं दर्ज है, लेकिन इतना जरूर है कि नयी बहाली वाली महिला सिपाहियों के साथ गलत तरह से छूने, डबल मिनिंग लांग्वेज में बात करने और यौन शोषण की घटना की चर्चा अंदर खाने होती रही है.
इस तरह की शिकायतें इसलिए भी सामने नहीं आयीं, क्योंकि विभाग में न तो विशाखा गाइड लाइन की कोई व्यवस्था है और न ही महिलाओं के लिए पुलिस इंटर्नल कमेटी ही बनी है जहां महिलाएं जाकर शिकायत कर सकें. इस तरह की घटनाओं से परेशान महिला रंगरूटों के पास कोई रास्ता नहीं दिखा इसलिए शुक्रवार को उन्होंने एक दुखद घटना के बाद बड़ा बवाल किया.
आंखों देखी
पुलिस लाइन का हंगामा भले ही शुक्रवार को थम गया हो,लेकिन माहौल में अभी गर्मी बनी हुई है. दरअसल शनिवार को पुलिस लाइन के गेट नंबर-तीन पर ड्यूटी पर तैनातसिपाहियों व एक दारोगा से जम कर बहस हुई. दरअसल गेट पर चार सिपाही मौजूद थे. इस दौरान एक दारोगा जी बोलेरो से गेट पर पहुंचे और गेट खोलने के लिए बोल रहे थे. इस दौरान सिपाही ने गेट खोलने से रोका और उनका परिचय पूछने लगा. क्योंकि दारोगा जी वर्दी में नहीं, बल्कि नारंगी कलर के कुर्ता पजामा में थे. जब सिपाही ने उन्हें रोका, तो वह भड़क गये.
गाड़ी में बैठे-बैठे ही बोले, क्या बेचैनी है… बस इतना सुनते ही सिपाही भड़क गये. उन्हें तमीज से बात करने की बात कही. इस पर दारोगा गाड़ी से उतर गये और रौब झाड़ने लगे. इस पर सिपाहियों ने भी उन्हें जम कर लताड़ लगायी और गाड़ी अंदर नहीं आने दी.
पुलिस लाइन गेट नंबर तीन पर सिपाहियों ने दारोगा को लताड़ा
महिला व पुरुष रंगरूट ट्रेनिंग के लिए जायेंगे दूसरे सेंटर
पुलिस लाइन में हुई हिंसा के बाद यहां मौजूद रंगरूटों को दूसरे ट्रेनिंग सेंटर भेजने की भी प्रक्रिया चल रही है. सूत्रों की मानें तो 200 से अधिक पुरुष रंगरूटों की सूची भी तैयार कर ली गयी है. इन्हें भागलपुर के नाथनगर और बीएमपी में ट्रेनिंग के लिए भेजा जायेगा. यहां बता दें कि नयी बहाली में 750 महिला रंगरूटों को ट्रेनिंग के लिए पटना पुलिस लाइन में रखा गया था.
लेकिन इस घटना के बाद दूसरी जगह पर ट्रेनिंग के लिए भेजा जायेगा. वहीं इतनी बड़ी घटना के बाद आक्रोश तो थम गया है, लेकिन अब कार्रवाई का डर सताने लगा है. पूरे दिन महिला व पुरुष पुलिसकर्मियों में यह चर्चा चलती रही कि उन्हें सस्पेंड किया जायेगा, जेल भेजा जायेगा या फिर डिसमिस किये जायेंगे.
छुट्टी नहीं मिलेगी, छुट्टी बंद है
पटना : छुट्टी नहीं मिलेगी, छुट्टी बंद है. यह बात कांस्टेबल सविता पाठक ने अपने एक मित्र से कही थी. उसकी महिला मित्र ने वाट्सअप पर 29 अक्टूबर को पूछा था कि पर्व में घर जाना है और सविता का यही जवाब था.
उक्त वाट्स अप पर चैटिंग की स्क्रीन शॉट को उसके एक मित्र ने फेसबुक पर डाला है और उसने यह लिखा है कि वह उसकी अंतिम चैटिंग को काफी मिस कर रही है. इस पोस्ट को शनिवार को साढ़े नौ बजे डाला है. फेसबुक पर लोगों ने उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है. इधर, इस वाट्सअप चैटिंग से यह बात स्पष्ट है कि पर्व को लेकर छुट्टी बंद करने की घोषणा पुलिस लाइन में कर दी गयी थी.
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